दूसरे देशों में बढ़ेगा भारतीय ‘औषधियों’ का निर्यात, योजना तैयार

केंद्र सरकार औषधि निर्यात को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना तैयार की गई है। इसके लिए कई देशों करार भी किया है।

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नई दिल्ली: भारतीय औषधियों की पहुंच दूसरे देशों में भी मतबूत होगी। इसके लिए आयुष मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना (आईसीस्कीम) विकसित की है। इसके तहत मंत्रालय आयुष से संबंधित उत्पादों व सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय आयुष औषधि निर्माताओं, आयुष सर्विस प्रोवाइडर को मदद देगा। 

25 देश, 52 संस्थान और 15 पीठों से है करार

आयुष मंत्रालय ने 25 देशों, 52 संस्थानों और 15 आयुष पीठों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच विभिन्न समझौतों के तहत पारंपरिक चिकित्सा की विश्वसनीयता व विश्वव्यापी स्वीकृति बढ़ाने के लिए सहयोग किए हैं।
आयुष मंत्रालय के सहयोग से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध प्रणालियों के लिए मानकीकृत शब्दावली दस्तावेज विकसित व प्रकाशित किए हैं। 

  • आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति के अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक दस्तावेज तैयार किए गए हैं।
  • वैश्विक मांग को पूरा करने को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सहयोग से 2022 में वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केन्द्र (जीटीएमसी) की स्थापना की।
  • इस सहयोग से भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (आईसीडी) और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप वर्गीकरण (आईसीएचआई) जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख उपकरणों के साथ एकीकृत करने में मदद मिली है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रकाशन विकसित किए जा रहे हैं: सिद्ध में प्रशिक्षण एवं अभ्यास के लिए तकनीकी रिपोर्ट तथा योग में प्रशिक्षण के लिए तकनीकी रिपोर्ट।
  • 2025-2034 के लिए पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक रणनीति के विकास का समर्थन करना।
  • आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी की टीएम प्रणाली पर समग्र दृष्टिकोण व ध्यान केंद्रित करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी उपायों के वर्गीकरण किए गए हैं।

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इन देशों के साथ हुआ है एमओयू

नेपाल, बांग्लादेश, हंगरी, त्रिनिदाद और टोबैगो, मलेशिया, मॉरीशस, मंगोलिया, तुर्कमेनिस्तान, म्यांमार, डब्ल्यूएचओ-जिनेवा, जर्मनी (संयुक्त घोषणा), ईरान, साओ टोम और प्रिंसिपे, इक्वेटोरियल गिनी, क्यूबा, ​​कोलंबिया, जापान (एमओसी), बोलीविया, गाम्बिया, गिनी गणराज्य, चीन, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, सूरीनाम, ब्राजील और जिम्बाब्वे के साथ पारंपरिक चिकित्सा और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग के लिए 24 देशों के बीच करार हुआ है। 

विदेशी विश्वविद्यालयों या संस्थानों में आयुष अकादमिक पीठ

आयुष अकादमिक पीठों की स्थापना के लिए ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, लातविया, हंगरी, स्लोवेनिया, आर्मेनिया, रूस, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, थाईलैंड आदि विदेशी संस्थानों के साथ 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

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