नई दिल्ली। भारत ने पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिकी विनिर्माण क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन छह गुना और निर्यात आठ गुना बढ़ चुका है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विज़न के तहत सरकार सेमीकंडक्टर सहित पूरी इलेक्ट्रॉनिक वैल्यू चेन को मजबूत बनाने पर काम कर रही है। 2020 में शुरू हुई पीएलआई योजनाओं चाहे वह बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स की हो या आईटी हार्डवेयर की, सभी ने उद्योग में बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। इन मजबूत नीतिगत कदमों और उद्योग विस्तार की वजह से भारत आज इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का एक विश्वसनीय वैश्विक हब बनकर उभर रहा है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 दिसंबर को राज्यसभा में दी।
सरकारी नीतियों के कारण इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹11.32 लाख करोड़ पहुंच गया है। मोबाइल विनिर्माण इकाइयां मात्र 2 से बढ़कर 300 से अधिक हो गई हैं और मोबाइल निर्यात ₹22 हजार करोड़ से बढ़कर ₹2.2 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक निर्यात भी अब 3.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई है।
1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले
रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी बढ़त देखने को मिली है और इलेक्ट्रॉनिकी सेक्टर लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है। सरकार ने 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण योजना भी शुरू की, जिसके लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
10 इकाइयों को मंजूरी दी गई
सेमीकंडक्टर सेक्टर को विकसित करने के लिए 2022 में शुरू किए गए ‘सेमिकॉन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अब तक 10 इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें सिलिकॉन फैब, पैकेजिंग और मेमोरी यूनिटें शामिल हैं। सरकार डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) के जरिए चिप डिजाइन को भी बढ़ावा दे रही है। देश के 394 विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक डिजाइन उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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ग्लोबल चिप डिजाइन कंपनियों के भारत में डिजाइन सेंटर मौजूद
आज लगभग सभी प्रमुख ग्लोबल चिप डिजाइन कंपनियों के भारत में डिजाइन सेंटर मौजूद हैं, और भारतीय इंजीनियर 2 nm जैसी उन्नत चिप्स डिज़ाइन कर रहे हैं। विशेष गैसों, कंपोनेंट्स और उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी भारत में अपने संचालन बढ़ा रही हैं, जिससे संपूर्ण सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है।



