नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक 2026 ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के लिए भी स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसे भारत के संवैधानिक दावे को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
यह विधेयक केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal द्वारा लोकसभा में पेश किया गया। इसके जरिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) का कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
पीओके के लिए क्या है प्रावधान?
विधेयक के अनुसार, यदि भविष्य में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत के नियंत्रण में आता है, तो वहां के लिए भी परिसीमन की प्रक्रिया लागू की जाएगी। इसके लिए Election Commission of India को अधिकार दिया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण करे।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके क्षेत्र के लिए 24 सीटें आरक्षित हैं, लेकिन वहां चुनाव नहीं होते क्योंकि यह क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में है। नया विधेयक इन सीटों को भविष्य में सक्रिय करने का रास्ता खोलता है।
भारत का ऐतिहासिक दावा
भारत का पीओके पर दावा 1947 में महाराजा Hari Singh द्वारा हस्ताक्षरित ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर आधारित है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। इसके अलावा, 1994 में भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान से इस क्षेत्र को खाली करने की मांग की थी। समय-समय पर सरकार और राजनीतिक नेतृत्व इस दावे को दोहराते रहे हैं।
गृह मंत्री Amit Shah भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे वापस लिया जाएगा।
राजनीतिक और रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन विधेयक में पीओके को शामिल करना केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। यह दर्शाता है कि भारत अपने दावे से पीछे हटने वाला नहीं है और भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है।
तीन अहम विधेयक पेश
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी दिन तीन महत्वपूर्ण विधेयक—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक—लोकसभा में पेश किए हैं। इनका उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करना भी है। परिसीमन विधेयक 2026 में पीओके को लेकर किए गए प्रावधान ने इसे महज चुनावी सुधार से आगे बढ़ाकर एक बड़े राष्ट्रीय और कूटनीतिक मुद्दे में बदल दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस पर राजनीतिक सहमति बनती है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि इस कदम ने भारत के रुख को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है



