नई दिल्ली: शनिवार को ईद से पहले उत्तम नगर के हस्तसाल गांव की संकरी गलियों में माहौल काफी भारी है। इलाके में आमतौर पर दिखने वाली उत्सव की चहल-पहल इस बार गायब है। होली पर हुए एक झगड़े में 26 वर्षीय तरुण कुमार की हत्या के कुछ ही हफ्तों बाद, स्थानीय निवासी भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच एक अजीब सी शांति और डर का अनुभव कर रहे हैं।
भारी पुलिस तैनाती और फीके जश्न के बीच, निवासियों ने ईद के दौरान बदले हुए माहौल पर दुख व्यक्त किया। 18 वर्षीय वैशाली कुमार अपने घर के बाहर ईद की खास पहचान ‘सेवइयां’ बेच रही थी। उन्होंने बताया, “जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हर साल मेरे माता-पिता ईद से पहले प्रतिदिन 10,000 रुपये की सेवइयां बेचते थे। इस साल यह बिक्री घटकर 3,500 रुपये रह गई है। डर के कारण पास के इलाकों से लोग इस बाजार में नहीं आ रहे हैं।”
7 वर्षीय राबिया खानम के लिए ईद का मतलब हमेशा गलियों में सेवइयों की खुशबू, मेहंदी लगाने वालों से सजे बाजार और नए कपड़ों के लिए खरीदारों की भीड़ होता था। राबिया ने अपने घर के भीतर बैठे हुए कहा, “बहुत उत्साह होता था… लेकिन इस साल, वह बात नहीं रही।” इस इलाके में 4 मार्च को हुए झगड़े के बाद से ही तनाव बना हुआ है।
विवाद की जड़
तनाव की शुरुआत 4 मार्च को हुई थी, जब छत से एक 11 वर्षीय बच्ची द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा एक मुस्लिम महिला को लग गया था। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच कहासुनी हुई, जिसने बड़े झगड़े का रूप ले लिया और कम से कम आठ लोग घायल हो गए।
26 वर्षीय तरुण कुमार ने कुछ दिनों बाद दम तोड़ दिया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है और दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है—ये सभी मुस्लिम परिवार के रिश्तेदार हैं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और भाषणों ने सांप्रदायिक तनाव को और हवा दी है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने ईद के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। दंगारोधी वाहन ‘वज्र’ और रसद वाहन ‘विक्रांत’ के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान हर गली के प्रवेश द्वार पर तैनात हैं।
गुरुवार को यह मामला अदालत तक भी पहुंचा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस और नागरिक प्रशासन को निर्देश दिया कि वे ईद के दौरान सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। अदालत ने जोर दिया कि यह त्योहार “खुशी मनाने” के लिए है और अधिकारी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं।
55 वर्षीय आरिफ खान ने बताया, “नवरात्र के कारण मांस की कई दुकानें बंद हैं। कई किराएदार और दुकानदार अपने पैतृक घर चले गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हालिया हत्या के कारण इलाके में एक अनजाना सा डर व्याप्त है।”
निगरानी और एहतियात
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इलाके की निगरानी के लिए कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि लोगों में सुरक्षा का भाव पैदा हो सके। पुलिस सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रख रही है और कई भड़काऊ पोस्ट हटा दिए गए हैं।
हत्या के बाद से कई दक्षिणपंथी समूहों ने इलाके का दौरा किया और विरोध प्रदर्शन भी किए। कुछ दिन पहले अय्यप्पा पार्क में एक ‘आक्रोश सभा’ भी आयोजित की गई थी, जिसे पुलिस ने रोक दिया था। फिलहाल मस्जिदों और ईदगाहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।



