नई दिल्ली। राजधानी में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और भवनों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। इसी दिशा में उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर नागरिक सुविधाओं, आधारभूत ढांचे और संरचनात्मक सुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया। बैठक में एलजी ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए निगरानी, कार्रवाई और ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापक एवं प्रभावी एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।
एलजी संधू ने एमसीडी से एक ऐसा मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क यानी कि नियामक ढांचा तैयार करने को कहा है जो बिल्डिंग बायलॉज का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे, अवैध निर्माण, विस्तार करने वालों पर भारी जुर्माना लगाए और सभी म्यूनिसिपल जोनों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करे। इस एक्शन प्लान को जल्द से जल्द एलजी सचिवालय के सामने पेश करने का निर्देश दिया गया है।
अवैध निर्माण पर तीन-स्तरीय प्रहार
बैठक में अवैध निर्माण को पूरी तरह रोकने और नियमित करने के लिए एक सख्त कार्ययोजना पर चर्चा की गई। जिसमें समय-बद्ध रेगुलेटरी कार्रवाई की बात कही गई है। एमसीडी एक बेहद आक्रामक और समय-बद्ध रणनीति शुरू करेगी। इसके तहत एक निश्चित समयसीमा के भीतर चल रहे और पहले से मौजूद सभी अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह सील या ध्वस्त किया जाएगा।
दूसरा है एमसीडी उन अवैध आवासीय और व्यावसायिक वर्टिकल विस्तार (बिल्डिंग को ऊपर की तरफ अवैध रूप से बढ़ाना) की पहचान कर उन पर रोक लगाएगी, जो पास हुए बिल्डिंग ब्लूप्रिंट या मानक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हैं। तीसरा और अहम निर्देश यह है कि अब जोनल स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। यदि किसी भी क्षेत्र में कोई अवैध निर्माण या संशोधन होता है और उसकी पहचान नहीं हो पाती है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के स्थानीय इंजीनियरों, तकनीकी स्टाफ और म्यूनिसिपल ओवरसाइट अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर कार्रवाई होगी।
मानसून और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी फैसले
अवैध निर्माण के अलावा बैठक में राजधानी की अन्य प्रमुख नागरिक प्राथमिकताओं की भी समीक्षा की गई।
आगामी मानसूनी सीजन को देखते हुए नगर निगम ने अपना ‘मानसून प्लान’ पेश किया। इसमें मानसून आने से पहले स्थानीय स्तर पर गाद जमा होने और जलभराव को रोकने के लिए बरसाती नालों की सफाई और रखरखाव को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
बैठक में राजधानी के लैंडफिल साइटों से पुराने कचरे के निस्तारण और कचरा डंपिंग की मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा की गई, ताकि स्वच्छता मानकों को और मजबूत किया जा सके। हवा में फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ‘डस्ट मिटिगेशन’ (धूल नियंत्रण) के उपायों की समीक्षा की गई। एलजी तरणजीत सिंह संधू ने निर्देश दिया कि सड़कों की मरम्मत और फुटपाथों को ठीक करने का काम हर हाल में मानसून शुरू होने से पहले पूरा कर लिया जाए।
ग्राउंड पर दिखना चाहिए असर
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ कहा कि इन कदमों का असर नवंबर महीने के बाद से जमीन पर दिखना चाहिए, क्योंकि उसी दौरान दिल्ली में हवा का प्रदूषण स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।



