नई दिल्ली: साइबर क्राइम के बढ़ते जाल की काट मिल गई है। साइबर ठग अब आपके बैंक खाते में जमा पैसे या आपके फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के डेटा को हाथ तक नहीं लगा पाएंगे। वइ इसलिए कि केंद्र सरकार ने इन पर नकेल कसने के लिए मजबूत कदम बढ़ाया है।
असल में, भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं। कोरोना के बाद से लोग ऑनलाइन भुगतान पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। कुछ महीने पहले आई एक रिपोर्ट की मानें तो 2024 में साइबर ठगों ने भारत में 23 हजार करोड़ रुपये की ठगी की। वहीं 1.91 मिलियन लोगों ने साइबर अपराध की शिकायत की थी जो 2019 के मुकाबले 10 गुना ज्यादा है। साइबर ठग अब वारदात में एआई का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा की चुनौतियां ज्यादा बढ़ गई हैं।
सरकार यह कदम उठा रही है
साइबर सुरक्षा के मद्देनजर भारत सरकार क्वांटम कंप्यूटिंग पर जोर दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) और साइबर सुरक्षा फर्म एसआईएसए ने संयुक्त रूप से ‘ट्रांजिशनिंग टू क्वांटम साइबर रेडीनेस’ नाम से श्वेतपत्र जारी किया है।
दरअसल, क्वांटम कंप्यूटिंग अब सैद्धांतिक संभावनाओं से व्यावहारिक क्रांति की ओर बढ़ रही है। तमाम देश और टेक्नॉलजी सेक्टर की संस्थाएं क्वांटम रिसर्च पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इससे पुराने एन्क्रिप्शन (कूट-लेखन) के लिए जोखिम बढ़ रहा है। आज के दौर में डिजिटल सुरक्षा के लिए आरएसए और ईसीसी जैसे एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम काफी अहम हो गए हैं। ऐसे में भारत के लिए यह बदलाव डेटा सुरक्षा, वित्तीय लेनदेन और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि क्वांटम तत्परता एक रणनीतिक अनिवार्यता है क्योंकि हम साइबर सुरक्षा में क्वांटम प्रौद्योगिकी की क्रांतिकारी क्षमता के लिए तैयारी कर रहे हैं। जैसे-जैसे हम विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल, एआई और क्वांटम परिवर्तनों से गुजर रहे हैं। आईसीटी ढांचे में समय रहते स्पष्टता, गति और लचीलापन लाना आवश्यक है।
खतरे होंगे कम
सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा, ‘क्वांटम कंप्यूटिंग खतरे को कम करेगी। एसआईएसए के साथ यह साझेदारी निजी क्षेत्र के नवाचार और सरकारी रणनीतिक पहलों के बीच सार्वजनिक-निजी सहयोग के महत्व को दर्शाती है। एसआईएसए के सीईओ और संस्थापक दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि 30 साल में साइबर सुरक्षा के सबसे बड़े बदलाव में क्वांटम कंप्यूटिंग अहम भूमिका निभा रही है।
डिजिटल भरोसे का आधार कामजोर है
उन्होंने कहा कि जिन प्रणालियों पर हमारा डिजिटल भरोसा है, वे क्वांटम के संदर्भ में कमजोर हैं। हमारे कौशल, सीईआरटी-इन के सक्रिय साइबर सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं के रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ मिलकर देश के डिजिटल इको-सिस्टम के भविष्य की सुरक्षा के लिए समग्र रणनीति प्रदान करते हैं।
बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अहम
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश डिजिटल नवाचार में आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे यह श्वेतपत्र संगठनों को क्वांटम कंप्यूटिंग के उभरते जोखिमों को समझने, उनका पूर्वानुमान लगाने और उनका सामना करने में मदद करने काफी मदद करता है। बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया है। यह व्यावहारिक तकनीकी सुझावों को सक्रिय सुरक्षा और लचीलेपन की संस्कृति को बढ़ावा देता है।
क्या हैं एसआईएसए और सीईआरटी-इन
सीईआरटी-इन साइबर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाली राष्ट्रीय एजेंसी है। इसे सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2000 के अनुसार साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए नामित किया गया था। यह साइबर क्राइम पर सूचनाएं जुटाना और उनका विश्लेषण करके जानकारी आगे पहुंचाना है।
यह एजेंसी पूर्वानुमान लगाने के साथ साइबर क्राइम के प्रति सावधान भी करती है। एसआईएसए डिजिटल भुगतान उद्योग के लिए साइबर सुरक्षा समाधानों में काफी आगे है । पीसीआई सुरक्षा मानक परिषद के वैश्विक भुगतान फोरेंसिक अन्वेषक के रूप में यह निवारक, जासूसी और सुधारात्मक सुरक्षा समाधानों पर काम करता है।
क्या है क्वांटम कंप्यूटिंग
यह तेजी से उभरती तकनीक है जिसमें पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए गंभीर समस्याओं के समाधान को क्वांटम यांत्रिकी के नियमों का उपयोग किया जाता है।
भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग पर कितना काम हुआ
- सरकार ने अपने 2021 के बजट में क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिप्टोग्राफी, संचार और सामग्री विज्ञान में विकास को बढ़ावा देने के लिए 8,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।
- 2021 के दिसंबर में भारतीय सेना ने मध्य प्रदेश स्थिति सैन्य इंजीनियरिंग संस्थान में क्वांटम कंप्यूटिंग प्रयोगशाला और एआई केंद्र बनाया था।
- सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स ने 2021 में एक क्वांटम कम्युनिकेशन लैब लॉन्च की थी। यह 100 कि.मी. से अधिक मानक ऑप्टिकल फाइबर का सहयोग कर सकता है।
- उन्नत प्रौद्योगिकी के रक्षा संस्थान (DIAT) और ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’ (CDAC) क्वांटम कंप्यूटरों के सहयोग और विकास के लिए एक साथ आए।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और IISER पुणे के लगभग 13 अनुसंधान समूह -HUB क्वांटम टेक्नोलॉजी फाउंडेशन चला रहे हैं।
- कई स्टार्ट-अप जैसे कुनु लैब्स, बंगलूरू; बोसॉनक्यू, भिलाई हैं।



