सीएसआईआर-आईसीएमआर ने मिलकर बनाई स्वास्थ्य अनुसंधान की नई रणनीति

सीएसआईआर-आईसीएमआर ने आज दिल्ली में उच्च-स्तरीय बैठक कर स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रहे संयुक्त प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की और आने वाले समय में दवाइयां, ड्रोन से दवा पहुंचाना, वेस्टवॉटर निगरानी जैसे बड़े कामों को तेज करने का फैसला किया। दोनों संस्थानों ने तय किया कि अब एक-दूसरे की ताकत को जोड़कर जल्दी और बेहतर परिणाम देश को दिए जाएंगे।

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नई दिल्ली: बैठक की सह-अध्यक्षता सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की। दोनों ने साफ कहा कि सीएसआईआर की वैज्ञानिक-तकनीकी ताकत और आईसीएमआर की जन-स्वास्थ्य की समझ को मिलाकर देश को विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य समाधान दिए जाएंगे। बैठक में सीएसआईआर की बनी नई दवाओं (मॉलिक्यूल्स) को जल्दी से क्लिनिकल ट्रायल में ले जाने, आईसीएमआर की बड़ी जानवरों पर टॉक्सिसिटी जांच सुविधा का इस्तेमाल करने और दोनों संस्थानों के बीच जिम्मेदारियां बांटने पर विस्तार से चर्चा हुई।

गंदे पानी की निगरानी अब और मजबूत होगी

शहरों, अस्पतालों और मोहल्लों के सीवर के पानी में वायरस-बैक्टीरिया की जांच (वेस्टवॉटर सर्विलांस) पहले से चल रही है। अब इसे कई और बीमारियों के लिए बढ़ाया जाएगा और वन हेल्थ मिशन के तहत इसे और व्यवस्थित किया जाएगा। दोनों संस्थान मिलकर इसे पूरे देश में फैलाएंगे ताकि कोई महामारी पहले ही पकड़ में आ जाए।

मेडिकल इमरजेंसी में दवा पहुंचाने के लिए ड्रोन सेवा

बैठक में एक नया और बड़ा फैसला लिया गया कि दोनों संस्थान मिलकर डिजिटल तरीके से नियंत्रित मेडिकल ड्रोन सेवा शुरू करेंगे। दुर्गम इलाकों और आपात स्थिति में दवा-खून-नमूने तेजी से पहुंचाने के लिए यह सेवा तैयार की जाएगी। इसके लिए जल्द ही संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू होगा।

युवा शोधकर्ताओं को मिलेगा दोगुना मौका

एसीएसआईआर-आईसीएमआर का संयुक्त पीएचडी प्रोग्राम पहले से चल रहा है। अब इसे और बड़ा किया जाएगा। आईसीएमआर की फेलोशिप को भी सीएसआईआर की फेलोशिप के साथ जोड़ा जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा वैज्ञानिक स्वास्थ्य क्षेत्र में रिसर्च कर सकें।

डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल हेल्थ और पर्यावरण-स्वास्थ्य पर नई पहल

बैठक में बायोमेडिकल साइंस, नई जांच किट, डिजिटल हेल्थ (ऐप-आधारित स्वास्थ्य सेवाएं) और पर्यावरण से होने वाली बीमारियों पर निगरानी के लिए भी संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला हुआ। दोनों संस्थानों ने तय किया कि अब हर बड़े प्रोजेक्ट के लिए समय-सीमा निर्धारित होगी और हर तीन-छह महीने में प्रगति की समीक्षा होगी।

समय पर परिणाम और बेहतर समन्वय मंत्र अपनाया

डॉ. कलाइसेल्वी और डॉ. बहल ने कहा कि अब सिर्फ मीटिंग नहीं, बल्कि ठोस और तेज परिणाम चाहिए। इसके लिए नई संयुक्त समितियां बनेंगी, प्रोजेक्ट बनाने की प्रक्रिया आसान होगी और हर क्षेत्र में दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक एक साथ काम करेंगे। बैठक के अंत में दोनों महानिदेशकों ने भरोसा दिलाया कि आने वाले सालों में भारत को सस्ती, विश्व-स्तरीय दवाएं, जांच सुविधाएं और स्वास्थ्य तकनीकें इसी मजबूत सहयोग से मिलेंगी।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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