PCIM&H ने शुरू किया 5 दिन का विशेष प्रशिक्षण

आयुष मंत्रालय के भेषज संहिता आयोग (PCIM&H) ने 24-28 नवंबर तक आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के नियामकों-निर्माताओं को नई तकनीक और सख्त गुणवत्ता मानक सिखाने के लिए पांच दिन का प्रशिक्षण शुरू किया। इससे देश में मिलावट रहित, विश्वस्तरीय ASU&H दवाएं बनाने-जांचने की ताकत बढ़ेगी।

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नई दिल्ली: भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषज संहिता आयोग (PCIM&H) ने पांच दिन का खास ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया। यह प्रोग्राम 24 नवंबर से 28 नवंबर, 2025 तक चलेगी। इसमें राज्य दवा निरीक्षक, प्रोफेसर, लैब वैज्ञानिक, सरकारी एनालिस्ट और दवा कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हैं। मकसद एक ही है आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाएं पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित हों।

आधुनिक मशीनों से जांच का प्रशिक्षण

पांच दिनों में प्रतिभागियों को सिखाया कई गुण सिखाए जाएंगे। इसमें एनएबीएल मानकों के अनुसार लैब चलाना, अच्छी विनिर्माण प्रक्रिया (GMP) कैसे लागू करें, जड़ी-बूटियों की पहचान, केमिकल-माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट, भारी धातु और कीटनाशक की जांच की नई तकनीक और दवा की शेल्फ-लाइफ कैसे पता करें सिखाया जाएगा। इसके अलावा हमदर्द लैबोरेट्री (गाजियाबाद) और डॉ. विलमर श्वाबे (नोएडा) जैसी बड़ी कंपनियों के कारखानों का दौरा भी होगा ताकि किताबी ज्ञान के साथ फैक्ट्री का व्यावहारिक अनुभव मिले।

दुनियाभर में बढ़ रही भारत की ASU&H दवाओं की साख

उद्घाटन में आयुष मंत्रालय की सलाहकार (होम्योपैथी) डॉ. प्रीता किझाक्कुटिल ने कहा कि PCIM&H ने जो नई मशीनें और तकनीकें अपनाई हैं, उससे हमारी दवाएं विश्व स्तर की हो गई हैं। मोरारजी देसाई योग संस्थान के निदेशक प्रो. काशीनाथ समगंडी ने बताया कि भारत के आयुर्वेद-यूनानी फार्माकोपिया को अब अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई देश मान्यता दे रहे हैं।

देश के कोने-कोने से आए 35 विशेषज्ञ

प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, असम, कर्नाटक के दवा निरीक्षक शामिल होंगे। इसके अलावा, जयपुर का राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, चेन्नई का सिद्ध रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद का यूनानी स्किन रिसर्च सेंटर, नोएडा का होम्योपैथी रिसर्च इंस्टीट्यूट और श्रीनगर का यूनानी रिसर्च सेंटर भी शिरकत करेगा।

मिलावट रोकने की सबसे मजबूत कड़ी बनेगा यह प्रशिक्षण

PCIM&H के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह ने कहा कि जब हमारे निरीक्षक और वैज्ञानिक खुद सबसे नई तकनीक जान लेंगे, तो बाजार में कोई मिलावटी या घटिया दवा नहीं बिक पाएगी। ये प्रशिक्षण हर साल होता रहेगा ताकि सारे हितधारक हमेशा अपडेट रहें। आयुष मंत्रालय का यह कदम साफ बता रहा है कि अब देश सिर्फ आयुर्वेद-होम्योपैथी को बढ़ावा ही नहीं दे रहा, बल्कि इनकी गुणवत्ता को भी दुनिया के सबसे ऊंचे मानक पर ले जा रहा है।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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