भारत के 15वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए सीपी राधाकृष्णन, 452 वोट पाकर जीता चुनाव

एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के बी. सुर्दशन रेड्डी को हराकर यह चुनाव जीता। सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले जबकि रेड्डी को 300 वोट ही मिल पाए। राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल पीसी मोदी ने नतीजों की घोषणा की।

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नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का ऐलान हो गया है। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने इस चुनाव को जीत लिया है और इसके साथ ही वह देश के 15वें नए उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। सीपी राधाकृष्णन इस चुनाव में 452 वोट मिले हैं। उनके सामने विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बी. सुर्दशन रेड्डी को मैदान में उतारा था। रेड्डी को महज 300 वोट ही मिल पाए। भाजपा ने दावा किया है कि चुनाव में जमकर क्रॉस वोटिंग भी हुई है।

राधाकृष्णन का मुकाबला इंडिया गठबंधन के बी सुदर्शन रेड्डी से था

उपराष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का सीधा मुकाबला विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी से था। सोमवार को संसद परिसर में पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में सियासी गहमागहमी रही। सत्ताधारी राजग गठबंधन के सांसदों की कार्यशाला बैठक में चुनावी प्रक्रिया तथा मतदान करने के तौर-तरीके समझाए गए। आरएसएस और भाजपा से जुड़े चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन, जिन्हें मंगलवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया, अपने साथ समृद्ध राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव लेकर आए हैं जो राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में उनकी भूमिका में उपयोगी साबित होगा।

मृदुभाषी हैं राधाकृष्णन

मृदुभाषी और गैर-टकराव वाले नेता के रूप में देखे जाने वाले 67 वर्षीय राधाकृष्णन, जगदीप धनखड़ का स्थान लेंगे, जिन्होंने 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया था। वह इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाले तमिलनाडु के तीसरे नेता हैं। शुभचिंतकों द्वारा पचाई तमीजान (सच्चे तमिल) कहे जाने वाले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, जब उन्हें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सदस्य रहे राधाकृष्णन केंद्रीय मंत्री बनने के करीब पहुँच गए थे, लेकिन 1998 में भाजपा के तत्कालीन विधायकों द्वारा उनके नाम को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति पैदा होने के बाद उन्हें अपने ही तमिल साथी पोन राधाकृष्णन से हार का सामना करना पड़ा।

किशोरावस्था में आरएसएस में शामिल हुए थे

राधाकृष्णन किशोरावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए और संगठन और बाद में भाजपा में पदों पर आसीन हुए, जिससे पार्टी और राज्य में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी। सामाजिक रूप से प्रभावशाली और आर्थिक रूप से समृद्ध कोंगु वेल्लालर गौंडर समुदाय के सदस्य, वे 1996 में भाजपा की तमिलनाडु इकाई के सचिव बने और 2003 से 2006 के बीच पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष रहे। एक उत्साही खिलाड़ी, राधाकृष्णन कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस में चैंपियन और लंबी दूरी के धावक रहे हैं। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी शौक है।

19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा की

20 अक्टूबर, 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे राधाकृष्णन के पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री है। 16 साल की उम्र में आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में शुरुआत करते हुए, वे 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने। 2004 से 2007 के बीच, राधाकृष्णन ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस भूमिका में, उन्होंने 19,000 किलोमीटर की रथ यात्रा की, जो 93 दिनों तक चली। यह यात्रा सभी भारतीय नदियों को जोडऩे, आतंकवाद का उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करने, अस्पृश्यता को दूर करने और मादक पदार्थों के खतरे से निपटने जैसी उनकी मांगों को उजागर करने के लिए आयोजित की गई थी, जो भाजपा और आरएसएस के कुछ प्रमुख मुद्दे हैं।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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