नई दिल्ली / नेपाल: नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी आंदोलन अब भी जारी है। प्रधानमंत्री केपी ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसक प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार को पुलिस से हुई झड़पों में कम से कम 20 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को काठमांडू में भारी तोड़-फोड़ की है। प्रदर्शनकारियों ने नेताओं और कई मंत्रियों के घरों को आग के हवाले कर दिया है। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के काठमांडू स्थित घर पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला किया।
आर्मी के हाथ में नेपाल,पूरे नेपाल में कर्फ्यू
हिंसक प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए नेपाली आर्मी ने मंगलवार रात 10 बजे से पूरे देश में नियंत्रण ले लिया है। साथ ही नेपाली सेना ने अब तक की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि कुछ उपद्रवी मुश्किल समय का फायदा उठा रहे हैं और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सेना ने इस तरह की गतिविधियों को तुरंत बंद करने की चेतावनी दी है। सेना का दावा है कि वे हालात को नियंत्रण में लाने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद भी नहीं सुधरे हालात
प्रदर्शनकारियों के गुस्से को देखते हुए केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा देकर काठमांडू छोड़ दिया, लेकिन उसके बाद भी प्रदर्शनकारी थम नहीं रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आंदोलनकारियों ने ओली के निजी घर, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट भवन को आग के हवाले कर दिया। केपी ओली के इस्तीफे से पहले ही राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में हिंसा की लहर फैल गई थी। अब तक 20 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी नहीं बख्शा
हिंसक भीड़ ने नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों के घरों पर भी हमला किया। जिसमें शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल प्रचंड और झालानाथ खनाल के घरों में आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल के घर में आग लगने से उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से जल गईं, जिन्हें बर्न अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, शेर बहादुर देउबा को उनके घर में घुसकर पीटा गया और वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को काठमांडू में उनके घर के पास दौड़ा कर मारा गया।
5 साल में 3 देशों में हुआ तख्तापलट
1- म्यांमार – साल 2021 में 1 फरवरी को भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट हुआ। इसके बाद पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए और देश में गृह युद्ध छिड़ गया। 30 साल से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक 6500 से ज्यादा लोग इस लड़ाई में मारे गए। कुछ विद्रोही गुटों की अभी भी लड़ाई जारी है।
2- श्रीलंका- आर्थिक संकट के कारण 2022 में श्रीलंका में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। मार्च 2022 में प्रदर्शन शुरू हुए और जुलाई 2022 तक राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, 2025 में श्रीलंका में कुछ आर्थिक स्थिरता आई है। अनुरा कुमारा दिसानायके को 22 सितंबर 2022 को श्रीलंका का राष्ट्रपति बनाया गया।
3- बांग्लादेश- जून 2024 में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। धीरे-धीरे इस आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा और भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद 2024 में नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। हालांकि, बांग्लादेश में अभी भी राजनीतिक चुनौतियां बरकरार हैं।



