नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोहान्सबर्ग में शनिवार को G20 समिट में शिरकत की। उन्होंने समिट के पहले सेशन में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर फिर से विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में, G20 ने ग्लोबल फाइनेंस और ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को आकार दिया है। लेकिन, अब तक ग्रोथ के जो पैरामीटर इस्तेमाल किए गए हैं, उनसे बड़ी आबादी को रिसोर्स से वंचित होना पड़ा है और प्रकृति का बहुत ज्यादा दोहन भी हुआ है। अफ्रीका इसका एक बड़ा शिकार है। आज, जब अफ्रीका पहली बार G20 समिट होस्ट कर रहा है, तो हमें डेवलपमेंट के पैरामीटर पर फिर से सोचना होगा।
इंसान और प्रकृति एक साथ
इसे पाने का एक तरीका भारत के सभ्यतागत मूल्यों में है। और वह रास्ता है इंटीग्रल ह्यूमनिज़्म। मतलब, हमें इंसानों, समाज और प्रकृति को एक साथ देखना होगा। तभी तरक्की और प्रकृति के बीच तालमेल मुमकिन होगा। दुनिया भर में कई ऐसे समुदाय हैं जिन्होंने अपनी पारंपरिक और इको-बैलेंस्ड लाइफस्टाइल को बचाकर रखा है। ये परंपराएं न केवल सस्टेनेबिलिटी बल्कि सांस्कृतिक समझदारी, सामाजिक मेलजोल और प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान को भी दिखाती हैं।
युवा टैलेंट को सक्षम बनायें
भारत G20 के अंदर एक ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव दे रहा है। भारत का इंडियन नॉलेज सिस्टम्स इनिशिएटिव इसकी नींव का काम कर सकता है। यह ग्लोबल प्लेटफॉर्म आने वाली पीढ़ियों तक इंसानियत की मिली-जुली समझ को पहुंचाने में मदद करेगा। अफ्रीका का विकास और उसके युवा टैलेंट को सक्षम बनाना दुनिया के हित में है। इसलिए, भारत G20-अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर पहल का प्रस्ताव करता है। यह अलग-अलग सेक्टर के लिए “ट्रेन-द-ट्रेनर्स” मॉडल के तहत काम कर सकता है। सभी G20 पार्टनर इसे फाइनेंस और सपोर्ट कर सकते हैं।
लोकल कैपेसिटी को मिले बढ़ावा
हमारा मिलकर लक्ष्य है कि अगले दस सालों में अफ्रीका में दस लाख सर्टिफाइड ट्रेनर हों। ये ट्रेनर, बदले में, लाखों स्किल्ड युवा तैयार करेंगे। इस पहल का कई गुना असर होगा। इससे लोकल कैपेसिटी बनेगी और अफ्रीका के लंबे समय के विकास को बढ़ावा मिलेगा। हेल्थ इमरजेंसी और प्राकृतिक आपदाओं के संकट से निपटने के लिए भी हमारा सामूहिक प्रयास है। इसलिए, भारत का प्रस्ताव है कि G20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पांस टीम का गठन हो। इसमें G20 देशों के प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञ हों। ये टीम, किसी भी वैश्विक स्वास्थ्य संकट या प्राकृतिक आपदा के समय तेजी से रिकवरी के लिए तैयार रहे।
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ड्रग ट्रैफिकिंग का उठाया मुद्दा
एक और बड़ा विषय ड्रग ट्रैफिकिंग का है। नेशनल फेंटेनिल जैसे बेहद घातक ड्रग्स, तेजी से फैल रहे हैं। ये पब्लिक हेल्थ, सोशल स्टेबिलिटी और ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ये टैरिज्म को फाइनांस करने का भी एक बड़ा माध्यम है। इस वैश्विक खतरे का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए भारत, G20 Initiative on Countering the Drug–Terror Nexus का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत हम- फाइनांस, गवर्नेंस और सिक्योरिटी से जुड़े अलग-अलग साधनों को एक साथ ला सकते हैं। तभी ड्रग-टेरर इकोनॉमी को कमज़ोर किया जा सकता है।



