नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जाति आधारित जनगणना को रोकने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई।
जाति जनगणना रोकी जाए
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागती और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि केंद्र को जाति जनगणना से रोका जाए और संसाधनों के वितरण को जनसंख्या नियंत्रण से जोड़ा जाए। साथ ही, ‘एक बच्चे’ वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने की नीतियां बनाने का निर्देश देने की भी अपील की गई थी।
सीजेआई ने याचिकाकर्ता से पूछा सवाल
सुनवाई शुरू होते ही अदालत का ध्यान याचिका के ड्राफ्ट और उसमें प्रयुक्त शब्दों की ओर गया। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “इस याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा आपने कहां से सीखी? यह बदतमीजी की लैंग्वेज कहां से लेकर आते हैं आप लोग? आप लोग पिटीशन कैसे लिखते हैं?” अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक दस्तावेजों में गरिमाहीन भाषा का प्रयोग कतई स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने याचिका की खारिज
पीठ ने याचिकाकर्ता को नसीहत देते हुए कहा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट भागने के बजाय उन्हें संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए और उन मुद्दों पर उन्हें अवगत कराना चाहिए। अदालत ने याचिका को न केवल खारिज किया, बल्कि याचिकाकर्ता के व्यवहार और प्रस्तुति पर भी सवाल खड़े किए।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नीतिगत मामलों और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर इस तरह की अपरिपक्व और अभद्र भाषा वाली याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाएगा।



