नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मामले में खेड़ा को एक सप्ताह के लिए अग्रिम जमानत दे दी है। यह विवाद रिनिकी भुइयां पर कई पासपोर्ट रखने और विदेशों में अघोषित संपत्ति होने के आरोपों से जुड़ा है।
मुख्यमंत्री की पत्नी पर आरोप
पवन खेड़ा के खिलाफ असम पुलिस ने तब मामला दर्ज किया था जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में कार्रवाई करते हुए असम पुलिस ने हाल ही में दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास की तलाशी भी ली थी। इसके बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने अब उन्हें संबंधित निचली अदालत में नियमित अर्जी दाखिल करने के लिए सात दिनों का समय दिया है।
राजनीतिक प्रतिशोध
अदालत में खेड़ा की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया। सिंघवी ने कड़े शब्दों में कहा, “हम संवैधानिक काउबॉय के युग में नहीं रह रहे हैं, जहां पुलिस कहीं भी जाकर किसी को भी उठा ले। सिर्फ मानहानि के आरोपों के आधार पर असम से 100 लोगों की टीम दिल्ली भेजना तर्कसंगत नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि खेड़ा समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और उनके भागने की कोई संभावना नहीं है।
देवाजीत सैकिया ने दलीलों का किया विरोध
दूसरी ओर, असम के एडवोकेट जनरल देवाजीत सैकिया ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि असम कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है बल्कि वहां कानून का राज है। सैकिया ने पवन खेड़ा की याचिका के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, लेकिन उन्होंने हैदराबाद का पता दिखाकर और पहचान दस्तावेजों में हेराफेरी कर अदालत को गुमराह किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
फिलहाल, हाई कोर्ट के इस फैसले ने पवन खेड़ा को तात्कालिक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है, लेकिन मामले की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहने की उम्मीद है।



