मिर्जापुर: सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के एक 17 वर्षीय किशोर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कुत्ते की तरह भौंकता हुआ नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि चार महीने पहले एक कुत्ते के काटने के बाद लड़के को रेबीज हो गया, जिसके कारण वह इस तरह का व्यवहार कर रहा है। हालांकि, एम्स से प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट किया है।

डॉ. ने इंस्टाग्राम पर इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि रेबीज होने पर भी कोई इंसान कुत्ते की तरह नहीं भौंकता। उन्होंने समझाया कि रेबीज का वायरस इंसान के ब्रेनस्टेम को प्रभावित करता है, जिससे गले की मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन पैदा होती है। इस कारण मरीज को कुछ भी निगलने, यहां तक कि पानी पीने में भी असहनीय दर्द होता है, जिसे ‘हाइड्रोफोबिया’ कहा जाता है।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, गले में होने वाली इस ऐंठन के कारण कभी-कभी मरीज के गले से अजीब आवाजें निकल सकती हैं, लेकिन वे आवाजें कुत्ते के भौंकने जैसी बिल्कुल नहीं होती। वायरल वीडियो में दिख रहे बच्चे का व्यवहार रेबीज के बजाय ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ (जिसे पहले हिस्टीरिया कहा जाता था) या अत्यधिक डर की वजह से होने वाली एक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया हो सकती है। डॉ. ने सलाह दी कि ऐसे मामलों को ‘रेबीज’ का लेबल लगाने के बजाय न्यूरोलॉजिकल और मानसिक मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
मिर्जापुर की इस घटना में पता चला है कि किशोर को चार महीने पहले कुत्ते ने काटा था। परिवार ने उसे एंटी-रेबीज इंजेक्शन के दो डोज तो लगवाए, लेकिन तीसरा डोज नहीं लगवाया, जिससे कोर्स अधूरा रह गया। जब लड़के की हालत बिगड़ी, तो अंधविश्वास के चलते परिवार उसे ओझा के पास ले गया, लेकिन स्थानीय लोगों की सलाह पर उसे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने रेबीज के संदेह में उसे वाराणसी रेफर कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारियां तेजी से फैलती हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक डर पैदा होता है। रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, इसलिए कुत्ते के काटने पर तुरंत पूरा टीकाकरण करवाना अनिवार्य है, लेकिन इसके लक्षणों को लेकर अंधविश्वास या गलत धारणाएं नहीं पालनी चाहिए।



