नई दिल्ली: अमेरिका के भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ थोपने के बाद भारत ने आसियान देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते को मजबूत किया। 10 से 14 अगस्त के बीच आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (एआईटीआईजीए) संयुक्त समिति की 10वीं बैठक और संबंधित बैठकों की न केवल मेजबानी की, बल्कि इसे नए मुकाम पर पहुंचाया।
एशिया में भारत का बढ़ेगा प्रभाव
इस बैठक के बाद भारत का प्रभाव और बढ़ेगा। आसियान देशों के साथ व्यापार सुगम भी होगा। दरअसल, इस बैठक में संयुक्त समिति ने एआईटीआईजीए की वर्तमान में जारी समीक्षा को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया ताकि इसकी प्रभावशीलता, सुलभता और व्यापार की सुगमता से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाया जा सके। वार्ता के आठ सक्रिय दौरों में हुई प्रगति पर चर्चा की गई।
बैठक में इन देशों ने लिया हिस्सा
हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इन बैठकों की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अपर सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तूरा अहमद मुस्तफा ने की। आसियान के सभी दस सदस्य देशों ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। एआईटीआईजीए संयुक्त समिति के तहत आठ उप-समितियों में से सात बैठकें हुईं। व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप गहन सहयोग का एक मंच प्रदान किया।
इन सात सब कमेटियों (SC) की हुई बैठक
- कस्टम्स प्रोसीजर्स एंड ट्रेड फैसिलिटी (SC-CPTF)
- लीगल एंड इंटिट्यूशनल इश्यू (SC-LII)
- नेशनल ट्रीटमेंट एंड मार्केट एक्सेस (SC-NTMA)
- सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी (SC-SPS)
- रुल्स ऑफ ओरिजिन (SC-ROO)
- स्टैंडर्ड, टेक्निकल रेगुलेशन एंड कन्फोर्मिटी एसेसमेंट प्रोसीजर (SC-STRACAP)
- ट्रेड रेमिडिज (SC-TR)
भारत का 11 फीसदी व्यापार आसियान देशों के साथ
आसियान भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। यह भारत के वैश्विक व्यापार के लगभग 11 प्रतिशत हिस्से का योगदान देता है। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 123 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। आसियान देशों के साथ भारत का संबंध उसकी विदेश नीति और एक्ट ईस्ट पॉलिसी की नींव की अहम कड़ी है। जकार्ता में आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) के लिए एक अलग-अलग मिशन हैं। भारत और आसियान में पहले से ही 25 साल की डायलॉग पार्टनरशिप, 15 साल की समिट लेवल इंटरेक्शन और 5 साल की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है।
अगली बैठक दो महीने बाद
एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की अगली बैठक 6-7 अक्टूबर को इंडोनेशिया के जकार्ता स्थित आसियान सचिवालय में होने वाली है। इसकी मेजबानी मलेशिया करेगा।
क्या है आसियान (ASEAN)?
एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशिन नेशंस (आसियान) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का क्षेत्रीय संगठन है। इसकी शुरुआत 1967 में आसियान घोषणापत्र (बैंकॉक घोषणा) पर संस्थापक देशों इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड के सिग्नेचर करने के साथ हुई। 1990 के दशक में वियतनाम युद्ध के अंत और 1991 में शीत युद्ध के बाद क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बाद सदस्यता दोगुनी हो गई। ब्रुनेई (1984), वियतनाम (1995), लाओस और म्यांमार (1997), और कंबोडिया (1999) भी इस संगठन से जुड़ गए। यह संठन एशिया-प्रशांत के उपनिवेशी राष्ट्रों के बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये स्थापित किया गया था। इसका आदर्श वाक्य ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी’ है।
- तीन स्तंभ: पॉलिटिकल सिक्योरिटी कम्यूनिटी, इकॉनमिक कम्युनिटी और सामाजिक-सांस्कृतिक कम्युनिटी।
- उद्देश्यः दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समृद्ध और शांतिपूर्ण समुदाय के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति तथा सांस्कृतिक विकास में तेजी लाना।
- न्याय और कानून के शासन के लिये सम्मान और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के पालन के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना।
- आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में सामान्य हित के मामलों पर सक्रिय सहयोग और पारस्परिक सहायता को बढ़ावा देना। कृषि और उद्योगों के अधिक उपयोग, व्यापार विस्तार, परिवहन और संचार सुविधाओं में सुधार और लोगों के जीवन स्तर सुधार में अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग करने के लिए।
यह संगठन मैन्युफेक्चरिंग और व्यापार के प्रमुख वैश्विक केंद्रों सबसे तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाज़ारों में से एक है। दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, 2050 तक इसे चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में पहचान मिल सकती है। आसियान के पास चीन और भारत के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी श्रम शक्ति है। इसके सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया हैं।
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भारत के लिए कितना अहम यह संगठन
भारत को आर्थिक और सुरक्षा कारणों से आसियान देशों के साथ घनिष्ठ राजनयिक संबंध जरूरी है। इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति में सुधार करने में मदद मिल सकती है। कनेक्टिविटी परियोजनाएं पूर्वोत्तर भारत को केंद्र में रखती हैं, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों की आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित होती है। आसियान देशों के साथ बेहतर व्यापार संबंधों का मतलब होगा कि चीन की मौजूदगी का प्रतिकार तथा क्षेत्र में और भारत के लिए आर्थिक वृद्धि और विकास। आसियान भारत-प्रशांत में नियम-आधारित सुरक्षा वास्तुकला में एक केंद्रीकृत स्थिति रखता है, जो भारत के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसका अधिकांश व्यापार समुद्री सुरक्षा पर निर्भर है। पूर्वोत्तर में उग्रवाद और आतंकवाद का मुकाबला करने, कर की चोरी आदि से बचने के लिये आसियान देशों के साथ सहयोग आवश्यक है।
मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए)
- आसियान-ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार क्षेत्र
- आसियान-चीन मुक्त व्यापार समझौते
- आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र
- आसियान – जापान मुक्त व्यापार क्षेत्र
- आसियान-कोरिया गणराज्य मुक्त व्यापार क्षेत्र
- आसियान-हांगकांग, चीन मुक्त व्यापार क्षेत्र
- क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी



