AI रोकेगी तकनीक का गलत इस्तेमाल, रोजगार की राह आसान

भारत की एआई स्ट्रैटजी तकनीकी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने की है। चुनौतियों का समाधान करना और आर्थिक और रोजगार की राह आसान करने की है।

Share This Article:

नई दिल्ली: केंद्र सरकार एआई तकनीक के इस्तेमाल की रूपरेखा तैयार कर रही है। भारत के तकनीकी क्षेत्र का वार्षिक राजस्व इस वर्ष $280 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। इस क्षेत्र में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। 1,800 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) हैं, जिनमें से 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं।
भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं; पिछले साल भारत में नए स्टार्टअप्स में से 89% एआई-संचालित थे। स्टैनफोर्ड एआई रैंकिंग जैसी वैश्विक रैंकिंग में भारत को एआई कौशल, क्षमताओं और एआई का उपयोग करने की नीतियों में शीर्ष देशों में रखा गया है। भारत, गिटहब एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो इसके जीवंत डेवलपर समुदाय का प्रमाण है।

इंडिया एआई  मिशन 

इस मिशन को पिछले साल लॉन्च किया गया ताकि एआई को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए लॉन्च किया गया था। यह भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक मजबूत और समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करता है। एआई के विकास के लिए डेटासेट का विकास इंडियाएआई मिशन के मुख्य स्तंभों में से एक है।

एआईकोष – इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म

एआईकोष एक इंटिग्रेटेड डेटा प्लेटफॉर्म है जो सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटासेट को एकीकृत करता है। यह स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में डेटा गोपनीयता सुरक्षा के साथ क्यूरेटेड डेटासेट प्रदान करता है। डेटासेट सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, भारतीय स्टार्टअप्स आदि से प्राप्त किए जाते हैं, जो स्थानीय प्रासंगिकता सुनिश्चित करते हैं। उपलब्ध संसाधन डेवलपर्स के लिए बिल्डिंग ब्लॉक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वे मॉड्यूल को फिर से बनाने के बजाय मुख्य एआई कार्यक्षमता पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। प्लेटफॉर्म पर 1200 से अधिक भारत-विशिष्ट डेटासेट और 217 एआई मॉडल उपलब्ध हैं।
डेटासेट के उदाहरणः किसान कॉल सेंटर से किसान क्वेरी डेटा, राज्यों से भूवैज्ञानिक डेटा, मस्तिष्क के घावों के एआई-आधारित निदान का समर्थन करने के लिए क्लिनिकल, इमेजिंग और पैथोलॉजी डेटा। छोटे एआई मॉडल भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं; उदाहरण के लिए, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम जैसी भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस) मॉडल।  एक सैंडबॉक्स तंत्र प्रदान करता है जो भारतीय स्टार्टअप/शिक्षाविदों को नियंत्रित वातावरण में अपने उपकरणों का परीक्षण करने की अनुमति देता है। इस प्लेटफॉर्म पर 2,65,000 से अधिक विजिट, 6,000 पंजीकृत उपयोगकर्ता और 13,000 से अधिक संसाधन डाउनलोड हुए हैं। भारत डेटा एक्सचेंज (भारत डेटा प्लेटफॉर्म) प्लेटफॉर्म, ओपन गवर्नमेंट डेटा (ओजीडी) का एक विस्तार है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी

भाषिणी राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (एनएलटीएम) का हिस्सा है, जो एआई-आधारित भाषा समाधान बनाने पर केंद्रित है। नागरिक भाषादान  प्लेटफॉर्म पर 22 भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज़, टेक्स्ट और अनुवाद का योगदान करते हैं। 70 से अधिक अनुसंधान संस्थानों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से  बड़ी मात्रा में एनोटेटेड डेटासेट तैयार किए जाते हैं। इनमें भाषण पहचान, मशीन अनुवाद और अन्य भाषा प्रौद्योगिकियां शामिल हैं;

  • उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल डेटासेट तक केंद्रीकृत, सुरक्षित पहुंच के लिए स्वास्थ्य अनुसंधान डेटा रिपॉजिटरी।
  • (डब्लूएचओ, आईएसओ, एचएल7) जैसे वैश्विक मानकों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल (एनडीएचएम/एबीडीएम) का अनुपालन करता है।
  • इसमें नेशनल एनसीडी निगरानी सर्वेक्षण, आईसीएमआर-इंडियाएबी अध्ययन (2008-2020) के 1,13,043 प्रतिभागियों का डेटासेट शामिल है।
  • टीबी उपचार परीक्षण, मधुमेह रजिस्ट्री, रोगाणुरोधी प्रतिरोध नेटवर्क और इन-सीएक्सआर छाती के रेडियोग्राफ भी इसमें शामिल हैं।

हेल्थ सेक्टर में एआई

इंडियाएआई इंडिपेंडेंट बिजनेस डिवीजन (आईबीडी) ने नेशनल कैंसर ग्रिड (एनसीजी) के सहयोग से कैंसर एआई एंड टेक्नोलॉजी चैलेंज (कैच) ग्रांट प्रोग्राम लॉन्च करने की घोषणा की है। इससे कैंसर की जांच, निदान, उपचार सहायता और स्वास्थ्य सेवा कार्यों को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समाधानों के विकास और तैनाती का समर्थन करना है।
कैच ग्रांट प्रोग्राम चयनित टीमों को प्रति प्रोजेक्ट ₹50 लाख तक का अनुदान प्रदान करेगा जिनमें प्रौद्योगिकी इनोवेटर और क्लिनिकल संस्थान शामिल होंगे। इन अनुदानों का सह-वित्तपोषण इंडियाएआई और एनसीजी द्वारा किया जाएगा। इस पहल को एनसीजी अस्पताल नेटवर्क के भीतर एआई  समाधानों की प्रायोगिक तैनाती को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसका उद्देश्य नैदानिक प्रभाव और परिचालन तैयारियों के प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में इन समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करना है। सफल पायलट परियोजनाओं को इंडियाएआई द्वारा ₹1 करोड़ तक का अतिरिक्त स्केल-अप अनुदान भी मिल सकता है, ताकि उन्हें एनसीजी  नेटवर्क या अन्य राष्ट्रीय कार्यान्वयन माध्यमों से व्यापक रूप से लागू किया जा सके।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.