नई दिल्ली: देश की सेहत न केवल एलोपैथी बल्कि आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी से अच्छी हो इसके लिए सरकार कई पहलुओं पर काम कर रही है। इसमें आयुष मंत्रालय अहम रोल निभा रहा है। यह मंत्रालय जमीनी स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति पहुंचा रहा है। गंभीर बीमारियों की एलोपैथ दवाएं सबको आसानी से मिलें, इसके लिए सरकार दवाओं की कीमत पर सीमा तय कर रही है। साथ ही जेनरिक दवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। जगह-जगह जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। जहां 80 फीसदी तक छूट पर दवाएं मिल रही हैं। आइए जानते हैं-कैसे मजबूत हो रहा देश का स्वास्थ्य…
राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम)
आयुष मंत्रालय 2014 से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के माध्यम से इस योजना को चला रहा है। राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) से मिले प्रस्तावों के आधार पर एनएएम निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार, विभिन्न गतिविधियों के तहत आर्थिक रूप से मदद कर रहा है।
- आयुष स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का नाम अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) रखा गया है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाएं मिल रही हैं।
- पंचायत स्तर तक के आयुष औषधालयों को अपग्रेड किया जा रहा है।
- 10, 30 या 50 बिस्तरों वाले इंटिग्रेटेड आयुष अस्पतालों की स्थापना। दवाओं की भरपूर आपूर्ति की जा रही है।
- उन राज्यों में नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है जहां आयुष शिक्षण संस्थान कम हैं।
- आयुष स्नातक और स्नातकोत्तर संस्थानों में कोर्स के विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं।
- आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक प्रणालियों का आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकरण वैश्विक गति पकड़ रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इसे प्रोत्साहित कर रहा है।
डब्ल्यूएचओ का GCTM
गुजरात के जामनगर में डब्ल्यूएचओ का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र (Global Center for Traditional Medicine) है। सरकार ने आयुष प्रणालियों को आईसीडी-11 जैसे वैश्विक वर्गीकरणों में शामिल करने का भी समर्थन किया है। मानकीकृत और एकीकृत करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और अनुसंधान को बढ़ावा दे रही है।
25 देशों के बीच समझौता ज्ञापन
इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र योजना (आईसी योजना) विकसित की है। इस योजना के अंतर्गत, मंत्रालय आयुष उत्पादों और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारतीय आयुष औषधि निर्माताओं/आयुष सेवा प्रदाताओं को मदद प्रदान करता है। आयुष चिकित्सा प्रणालियों के प्रचार, विकास और मान्यता को सुगम बनाता है। योजना के तहत 25 देशों के बीच समझौता ज्ञापन, 15 आयुष चेयर समझौता ज्ञापन और 52 संस्थान-दर-संस्थान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
अनुसंधान के लिए छात्र शैक्षणिक पहल
सिद्धा (एसटीएआईआरएस), सीसीआरएस पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप स्कीम (पीडीएफ) और सिद्धा में हेल्थकेयर और मेडिसिन के शिक्षण पेशेवरों के लिए अनुसंधान संसेचन (आरआईटीएचएएमएस) को छात्रों और शोधकर्ताओं के बीच अनुसंधान को मजबूत करने के लिए सीसीआरएस द्वारा शुरू किया गया है। कोट्टायम में मानसिक रोगों के उपचार के लिए केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (एच) को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान में अपग्रेड किया गया है और इसमें चिकित्सा अभ्यास के लिए 13 सीटों और मनोचिकित्सा के लिए 12 सीटों के साथ दो विषयों में पीजी शिक्षा भी प्रदान की जा रही है।
प्रयोगशाला विकास
- होम्योपैथी में अनुसंधान करने के लिए डॉ. अंजलि चटर्जी क्षेत्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता में आणविक प्रयोगशाला, औषधि मानकीकरण प्रयोगशाला, पैथोलॉजी प्रयोगशाला, वायरोलॉजी प्रयोगशाला, पशु गृह।
- डॉ. डीपी रस्तोगी केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (होम्योपैथी), नोएडा में औषधि मानकीकरण प्रयोगशाला, इन-हाउस फार्मेसी, जेब्राफिश प्रयोगशाला, पशु गृह, जैव रसायन प्रयोगशाला।
नियंत्रित हो रही दवाओं की कीमत
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने डीपीसीओ, 2013 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमतें तय की हैं। 930 अनुसूचित फॉर्मूलेशन के लिए अधिकतम कीमतें तय की गई हैं जिनमें 131 कैंसर रोधी, 11 मधुमेह रोधी और 66 हृदय संबंधी फॉर्मूलेशन शामिल हैं। एनएलईएम, 2022 के अंतर्गत कीमतों के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के कारण औसत मूल्य में लगभग 17% की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप रोगियों को लगभग ₹3,788 करोड़ की अनुमानित वार्षिक बचत हुई।
3,482 दवाओ की कीमत तय हुईं
14 जुलाई तक 3,482 नई दवाओं के खुदरा मूल्य निर्धारित हुए। इनमें 1,924 मधुमेह-रोधी, कैंसर-रोधी और हृदय-संबंधी दवाएं शामिल हैं। 22 मधुमेह और 84 हृदय संबंधी गैर-अनुसूचित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को सीमित कर दिया गया है। इससे देश के मरीजों की करीब 350 करोड़ रुपये प्रति वर्ष बचत होने का अनुमान हैं।
42 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के व्यापार मार्जिन पर सीमा लगा दी गई है। इससे 526 ब्रांडों की दवाओं की कीमतों में औसतन लगभग 50% की कमी आई है। वहीं, मरीजों को लगभग 984 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत होने का अनुमान है। गैर-अनुसूचित फॉर्मूलेशनों के लिए, जिनमें गैर-अनुसूचित मधुमेह-रोधी, कैंसर-रोधी और हृदय-संवहनी (कार्डियोवस्कुलर) फॉर्मूलेशन शामिल हैं उनके लिए निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान उनके द्वारा जारी की गई दवाओं के एमआरपी में 10% से अधिक की वृद्धि नहीं करनी होगी।
जन औषधि केंद्र
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के उत्पाद समूह के अंतर्गत 2,110 दवाइयां और 315 शल्य चिकित्सा, चिकित्सा में काम आने वाली वस्तुएं और उपकरण उपलब्ध हैं। हृदय रोग, कैंसर-रोधी, मधुमेह-रोधी, संक्रमण-रोधी, एलर्जी-रोधी और जठरांत्र संबंधी दवाइयां और न्यूट्रास्युटिकल्स हैं। 30 जून तक इस योजना के तहत देश भर में 16,912 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोले गए हैं।
दवाओं की अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई
एनपीपीए दवाओं की अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई भी कर रहा है। पिछले पांच साल में 436 मामले दर्ज किए हैं। मनमानी करने वाली कंपनियों से ₹133.19 करोड़ जुर्माना भी वसूला है।



