नई दिल्ली: देश में बढ़ते छात्रों की आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए पूर्व न्यायमूर्ति रवींद्र भट की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय कार्यबल ने वेबसाइट लॉन्च की है। इसके जरिये ‘विद्यार्थी मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या’ विषय पर अपने सुझाव दे सकते हैं। दरअसल, यह कार्यबल उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के कल्याण में सुधार और आत्महत्याओं को रोकने के लिए सिफारिशें विकसित कर रहा है।
कार्यबल के अध्यक्ष ने यह देश भर के सभी प्रकार के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचइआई) को अपने दायरे में लाता है। इसमें सामाजिक विज्ञान, दिव्यांगता अधिकार, लिंग अध्ययन, नैदानिक मनोविज्ञान, सामुदायिक चिकित्सा आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं। रवींद्र भट ने सक्रिय समर्थन और सहयोग का आग्रह किया।
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यबल देश भर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों से लेकर निजी कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों तक विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। उच्च शिक्षा विभाग टास्क फ़ोर्स को हर संभव सहयोग प्रदान कर रहा है, चाहे वह समन्वय, डेटा साझाकरण, नीतिगत इनपुट या संस्थानों और हितधारकों तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के संदर्भ में हो।
इनसे ली जाएगी मदद
• उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थी
• ऐसे विद्यार्थियों के माता-पिता
• संकाय सदस्य
• मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता
• संस्थानों के प्रमुख
• आम जनता, जिसमें आत्महत्या से प्रभावित विद्यार्थियों के मित्र या परिवार के सदस्य, पूर्व विद्यार्थी, गैर सरकारी संगठन, मीडिया पेशेवर और अन्य संबंधित नागरिक शामिल हैं।
इन बिंदुओं पर है फोकस
पोर्टल पर संरचित ऑनलाइन सर्वेक्षण प्रश्नावली अंग्रेजी और हिंदी में उपलब्ध हैं। इन्हें विभिन्न विषयों पर गुमनाम और गोपनीय जानकारी एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनमें परिसर का वातावरण, समावेशिता और अपनापन, संकट और प्रणालीगत भेदभाव के स्रोत, मौजूदा सहायता प्रणालियाँ और शिकायत निवारण तंत्र, विद्यार्थी कल्याण में सुधार के लिए सुझाव
स्थानीय परामर्श और संस्थागत दौरे भी हैं शामिल
टास्क फोर्स देश भर के विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों का दौरा कर रही है। इस दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रशासकों और शिकायत निवारण समिति के सदस्यों के साथ सीधी बातचीत करती है। विद्यार्थियों के लिए अनुभव व्यक्त करने का खुला मंच मुहैया कराती है। वंचित और हाशिए पर पड़े समुदायों के विद्यार्थियों की ज़रूरतों और दृष्टिकोणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यार्थियों के कल्याण के लिए बुनियादी ढांचे और सहायता सेवाओं का आकलन किया जा रहा है। यह कार्य बल विषय विशेषज्ञों, गैर सरकारी संगठनों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ भी परामर्श कर रहा है। यह व्यापक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए प्रासंगिक आंकड़ों, रिपोर्टों और शोध की समीक्षा कर रहा है।
अपील
राष्ट्रीय कार्यबल ने सभी हितधारकों और इस पहल के लिए नियुक्त राज्य नोडल अधिकारियों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में सर्वेक्षणों का उत्तर देकर इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। इस सहभागी प्रक्रिया के माध्यम से एकत्रित विविध विचार और अनुभव कार्यबल की अंतिम सिफारिशों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।अधिक जानकारी और भाग लेने के लिए पोर्टल पर विजिट करें।
कुल आत्महत्याओं में से 7.6% छात्रों ने की
NCRB 2022 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में कुल आत्महत्याओं में से 7.6% विद्यार्थियों ने की थी। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक छात्रों ने आत्महत्या की।
क्या है कारण
- मनमुताबिक परीक्षा परिणाम न आना
- परीक्षा को लेकर तनाव
- नेगेटिव माहौल
- उत्पीड़न
- जातिगत भेदभाव
- रैगिंग
- घरेलू संघर्ष
- पारिवारिक कठिनाई
- बीमारी आदि



