नई दिल्ली: आने वाले समय में भारत का निर्यात अमेरिका जैसे चंद देशों पर निर्भर नहीं रहेगा। ब्रिटेन से व्यापारिक रिश्ता मुकम्मल होने के बाद अब न्यूजीलैंड से मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) प्रगाढ़ होते हुए दिख रहा है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता नई दिल्ली में हो चुकी है। इससे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के साझा उद्देश्य को और बल मिला। यह सझौता होने से अमेरिका की टैरिफ लगाने की धमको को करारा जवाब मिलेगा।
इस नए आर्धिक संबंध की नींव मार्च में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की यात्रा के दौरान पड़ी थी। 16 मार्च को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड सरकार के व्यापार व निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने बैठक ककर एफटीए की शुरुआत की थी। इसके बाद मई में नई दिल्ली में पहले दौर की वार्ता हुई। दूसरे दौर की वार्ता 14 से 25 जुलाई तक की गई।
इन पॉइंट पर चल रही बात
इस दौर में वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, उत्पत्ति के नियम, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं और व्यापार सुविधा, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, स्वच्छता और पादप स्वच्छता संबंधी उपाय और आर्थिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई। चर्चाओं में कई विषयों पर त्वरित सहमति बनाने में आपसी रुचि पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने एक संतुलित, व्यापक और दूरदर्शी समझौते पर पहुंचने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अब आगे क्या
तीसरे दौर की वार्ता इसी साल सितंबर में न्यूजीलैंड में होगी। इसमें आगे की चर्चा होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूजीलैंड के साथ भारत का द्विपक्षीय मर्चेंजाइज व्यापार 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 48.6% ज्यादा है। यह आर्थिक साझेदारी की बढ़ती संभावनाओं का संकेत है। इस मुक्त व्यापार समझौते से ट्रेड फ्लो में वृद्धि, निवेश संबंधों को बढ़ावा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन को बढ़ावा और दोनों देशों में व्यवसायों के लिए एक पूर्वानुमानित और सक्षम वातावरण स्थापित होने की उम्मीद है।
ब्रिटेन से हो चुका है समझौता
हाल ही में भारत ने ब्रिटेन के साथ व्यापक आर्थिक व व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किया है। इसे 99 फीसदी इंडियन प्रॉडक्ट ब्रिटेन के बाजार में बिना टैक्स के पहुंच सकेंगे। दोनों देशों के बीच इस करार से न केवल भारतीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। यह समझौता कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद और खिलौनों सहित श्रम-प्रधान क्षेत्रों को नया प्लेटफॉर्म मुहैया कराएगा। दोनों देशों के बीच 56 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। इसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। इस समझौते से कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, खिलौने और रत्न व आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट और जैविक रसायन के लिए नए द्वारा खुले हैं। इसके अलावा आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, वित्तीय और कानूनी सेवाओं, पेशेवर और शैक्षिक सेवाओं, और डिजिटल व्यापार बेहतर मंच मिलेगा।




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