नई दिल्ली: देशभर में जहरीली कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत मामले से हड़कंप मचा हुआ है। 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। शनिवार देर रात डॉक्टर प्रवीण सोनी को मध्य प्रदेश के छिंदवाडा से गिरफ्तार कर लिया गया, यह वही डॉक्टर है, जिसने अधिकांश बच्चों को सिरप लिखा था। इससे पहले सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर रोक लगा दिया है। इस सिरप को बनाने वाली कंपनी पर भी बैन लगा दिया गया है।
निजी क्लिनिक में बांटता था सिरप
डॉ. प्रवीण सोनी ने अपने क्लिनिक में बच्चों को कफ सिरप दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने छोटे बच्चों को भी यह सिरप पीने की सलाह दी थी। बच्चों को कोल्ड्रिफ और नैस्ट्रो डीएस दिया गया था, जिससे कथित तौर पर किडनी में संक्रमण के कारण बच्चों की मौत हो गई। तमिलनाडु सरकार ने इस कफ सिरप की जांच की तो पता चला कि इसमें 48 फीसदी जहर है। रिपोर्ट आते थी तमिलनाडु सरकार ने इसके प्रोडक्शन और बिक्री पर रोक लगा दिया। इसकी मैन्युफैक्चरिंग तमिलनाडु के कांचीपुरम में हो रही थी। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने इस सिरप से मरने वाले बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की है।
सरकार ने जारी की एडवाइजरी
कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप को लेकर देशभर में डर का माहौल बना हुआ है। सरकार की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है। केंद्र ने कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दी जाएं। बड़े बच्चों को भी कफ सिरप देने से पहले सावधानी रखें। आपको बता दें कि नेशनल इंस्ट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी, इंडियन कॉउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च, सीडीएससीओ,
नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट और आईआईएमएस-नागपुर के विशेषज्ञों की टीम मौत के कारणों की जांच कर रही है। 7 सितम्बर से लेकर अब तक 11 बच्चे किडनी फेलियर से मर चुके हैं जबकि 13 बच्चे, जिसमें 8 छिंदवाड़ा और बाकी नागपुर में इलाज करा रहे।
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एमपी सरकार की रिपोर्ट
इधर शनिवार रात, किडनी फेल होने से हुई 11 बच्चों की मौत पर मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्ट जारी हुई। इसमें पुष्टि हुई कि कोल्ड्रिफ सिरप में 46.2% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) था। इस बीच, दो अन्य सिरप, नेक्स्ट्रो-डीएस और मेफ्टोल पी, की रिपोर्ट “ठीक” पाई गई है। राजस्थानव में कफ सिरप पीने से शनिवार को तीसरे बच्चे की जान चली गई।



