नई दिल्ली | तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद अब पार्टी की कमान को लेकर विवाद गहरा गया है। सवाल उठ रहा है कि पार्टी का नेतृत्व ममता बनर्जी के हाथ में रहेगा या ऋतब्रत बनर्जी के पास जाएगा। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
ऋतब्रत बनर्जी ने सोमवार को नई नेशनल वर्किंग कमेटी की घोषणा की। इस नई टीम में ममता बनर्जी का नाम शामिल नहीं किया गया। उनकी जगह अरूप रॉय को चेयरमैन बनाया गया, जबकि अभिषेक बनर्जी को भी कमेटी से बाहर कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी अपनी नई कमेटी से जुड़े दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेज दिया।
ममता बनर्जी ने आयोग को अपनी समर्थक नेशनल वर्किंग कमेटी की सूची भेजी है। इस सूची में 24 नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसमें ममता बनर्जी को चेयरपर्सन और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव बताया गया है। खास बात यह है कि उसी दिन ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी से बाहर करने का दावा किया था।
ममता की सूची में डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन को संयुक्त सचिव, सुब्रत बख्शी को उपाध्यक्ष और सुभाषिश को कोषाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा शोभनदेव चटर्जी का नाम भी प्रमुख पद पर दर्ज किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी खेमे ने तेजी दिखाते हुए चुनाव आयोग तक अपनी बात पहले पहुंचाने की कोशिश की है। इससे पार्टी के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद को नया मोड़ मिल गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि अब यह मामला केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। अंतिम फैसला नियमों, कानूनी प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और समर्थक किस पक्ष के साथ खड़े होंगे। इसका स्पष्ट जवाब आने वाले समय और राजनीतिक घटनाक्रम के बाद ही मिल पाएगा।
फिलहाल इतना तय है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष खुलकर सामने आ चुका है और दोनों पक्ष अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं।



