हो ची मिन्ह सिटी पहुंचे भारतीय नौसेना के पोत, भारत-वियतनाम संबंधों को मिलेगी मजबूती

भारतीय नौसेना के दो आधुनिक और स्वदेशी युद्धपोत—आईएनएस उदयगिरि (स्टेल्थ फ्रिगेट) और आईएनएस कवरत्ती (एंटी-सबमरीन कार्वेट)—अपनी दक्षिण-पूर्व एशियाई परिचालन तैनाती के हिस्से के रूप में वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी पहुंचे हैं। मई 2026 में दोनों देशों के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर ले जाने के बाद यह भारत की पहली बड़ी सैन्य उपस्थिति है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और आपसी 'सद्भावना' को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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दिनांक 23 जून, 2026: दक्षिण-पूर्व एशिया के रणनीतिक परिदृश्य में भारत और वियतनाम के संबंध तेजी से एक नई ऊंचाई छू रहे हैं। इसी कड़ी में, 22 जून, 2026 को वियतनाम के ऐतिहासिक हो ची मिन्ह सिटी स्थित न्हा रोंग बंदरगाह (Nha Rong Port) पर भारतीय नौसेना के दो सबसे आधुनिक, स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित युद्धपोतों—आईएनएस उदयगिरि (INS Udaygiri) और आईएनएस कवरत्ती (INS Kavaratti)—ने लंगर डाला।

यह केवल दो देशों के नौसैनिक जहाजों का एक सामान्य बंदरगाह प्रवास (Port Visit) नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत और वियतनाम के बीच बढ़ रहे गहरे और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। यह तैनाती भारतीय नौसेना की उस क्षमता को भी प्रदर्शित करती है जिसके तहत वह अपने मित्र देशों के साथ मिलकर सुरक्षित समुद्री रास्तों (Sea Lines of Communication) की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

भव्य और औपचारिक स्वागत: गहरे संबंधों की गवाही

जब भारतीय नौसेना के ये दोनों शक्तिशाली पोत वियतनाम के तट पर पहुंचे, तो वहां का माहौल दोनों देशों के बीच के गहरे दोस्ताना संबंधों की गवाही दे रहा था। इस मिशन का नेतृत्व भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, रियर एडमिरल आलोक आनंद कर रहे हैं।

न्हा रोंग बंदरगाह पर इन पोतों का स्वागत करने के लिए वियतनाम पीपुल्स नेवी (Vietnam People’s Navy) के उच्च अधिकारी, हो ची मिन्ह सिटी पीपुल्स कमेटी के वरिष्ठ प्रतिनिधि और स्थानीय बंदरगाह प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। वियतनामी परंपरा और गर्मजोशी के साथ किए गए इस औपचारिक स्वागत ने यह साफ कर दिया कि भारत और वियतनाम के बीच की समुद्री साझेदारी कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है। यह स्वागत केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों नौसेनाओं के बीच सालों से चले आ रहे भाईचारे और सद्भावना का प्रदर्शन था।

भारतीय युद्धपोतों की खासियत: भारत की स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन

इस यात्रा पर गए दोनों युद्धपोत भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के बेहतरीन उदाहरण हैं। यह वियतनाम को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं से रूबरू कराने का भी एक शानदार अवसर है:

  1. आईएनएस उदयगिरि (INS Udaygiri): यह भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की नजरों से बचकर सटीक हमला कर सकता है। आधुनिक सेंसरों, मिसाइल प्रणालियों और लंबी दूरी के हथियारों से लैस यह पोत किसी भी बहुआयामी युद्धक स्थिति से निपटने में सक्षम है।
  2. आईएनएस कवरत्ती (INS Kavaratti): यह एक पनडुब्बी रोधी युद्धक कार्वेट (Anti-Submarine Warfare Corvette) है। इसका मुख्य काम समुद्र की गहराइयों में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ निकालना और उन्हें नष्ट करना है। इसमें बेहतरीन रडार और सोनार प्रणालियां लगी हैं, जो इसे हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बेहद खतरनाक बनाती हैं।

बंदरगाह प्रवास के दौरान क्या-क्या होगा?

इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान दोनों देशों की नौसेनाएं केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनके बीच कई व्यावहारिक और व्यावहारिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जो निम्नलिखित हैं:

  • पेशेवर बातचीत (Professional Interactions): दोनों नौसेनाओं के रणनीतिकार और अधिकारी आपस में बैठकर आधुनिक समुद्री चुनौतियों, पायरेसी (समुद्री डकैती) विरोधी अभियानों और आपदा प्रबंधन (HADR) पर अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा करेंगे।
  • क्रॉस-डेक आदान-प्रदान (Cross-Deck Exchanges): वियतनामी नौसेना के कर्मी भारतीय जहाजों का दौरा करेंगे और भारतीय नाविक वियतनामी पोतों पर जाएंगे। इससे दोनों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और तकनीकों को समझने में मदद मिलेगी।
  • खेल और सामुदायिक गतिविधियां: दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपसी सौहार्द और व्यक्तिगत संबंध मजबूत करने के लिए खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
  • वरिष्ठ नेतृत्व की बैठकें: रियर एडमिरल आलोक आनंद वियतनाम के शीर्ष सैन्य और नागरिक नेतृत्व से मुलाकात करेंगे, जिससे भविष्य के द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों का रोडमैप तैयार किया जा सके।

व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद पहली बड़ी उपस्थिति

इस यात्रा का समय (Timing) बेहद महत्वपूर्ण है। मई 2026 में ही भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को अपग्रेड करते हुए ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Enhanced Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर पहुंचाया है।

इस ऐतिहासिक समझौते के ठीक बाद जून 2026 में भारतीय नौसेना की यह इतनी बड़ी और प्रभावी उपस्थिति यह दर्शाती है कि दोनों देश कागजी समझौतों से आगे बढ़कर जमीन (और समंदर) पर काम करने के लिए कितने गंभीर हैं। वियतनाम के लिए भारत एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार है, जो दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों (जैसे UNCLOS) और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का समर्थन करता है।

निष्कर्ष: एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदम

आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती की हो ची मिन्ह सिटी की यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण का एक अहम हिस्सा है। भारत और वियतनाम की यह बढ़ती समुद्री जुगलबंदी न केवल दोनों देशों के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में शक्ति संतुलन और शांति बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगी। समंदर के रास्ते पनपी यह ‘सद्भावना’ आने वाले समय में दोनों देशों के इतिहास को और भी स्वर्णिम बनाएगी।

Meenu Rautela

Meenunewwork@gmail.com

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