VOC पोर्ट: हरित क्रांति की दिशा में भारत का एक नया ‘मॉडल’

केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने VOC पोर्ट को भारत के लिए 'सस्टेनेबल मैरीटाइम मॉडल' घोषित किया है। बंदरगाह ने अपने कार्बन उत्सर्जन में 45% की ऐतिहासिक कटौती की है और नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से 94% ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। इसके साथ ही, शिक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, जेनरेटिव AI (PortGPT) और अकादमिक साझेदारी के माध्यम से यह पोर्ट अब विश्व-स्तरीय मानकों को नई परिभाषा दे रहा है।

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तूतीकोरिन (Tuticorin): भारत के समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। हाल ही में, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, सर्वानंद सोनोवाल ने वी.ओ. चिदंबरनार पत्तन प्राधिकरण (VOCPA) का दौरा किया और इसे भारत में सतत समुद्री विकास के लिए एक ‘मॉडल’ के रूप में सराहा। यह उपलब्धि महज एक बंदरगाह के विकास की नहीं, बल्कि पर्यावरण, शिक्षा और तकनीक के एक अद्भुत संगम की कहानी है। आइए जानते हैं कैसे यह पोर्ट भारत की हरित समुद्री यात्रा का अग्रणी बना।

45% कम कार्बन उत्सर्जन: एक बड़ी उपलब्धि

VOC पोर्ट की पहली ‘सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट’ के अनुसार, बंदरगाह ने डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • नेट कार्बन उत्सर्जन: बंदरगाह ने अपने नेट कार्बन उत्सर्जन में लगभग 45% की कमी की है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): आज, बंदरगाह की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 94% हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा हो रहा है।
  • कार्बन तीव्रता: पिछले चार वर्षों में प्रति टन कार्गो पर कार्बन तीव्रता (carbon intensity) लगभग आधी हो गई है।
  • स्कोप-2 प्रमाणन: VOC पोर्ट को ‘स्कोप-2 एमिशन फ्री पोर्ट’ के रूप में मान्यता मिली है, जो इसके स्वच्छ ऊर्जा के प्रति समर्पण को सिद्ध करती है।

मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

शिक्षा का नया द्वार: केंद्रीय विद्यालय की शुरुआत

बंदरगाह के विकास के साथ-साथ सामुदायिक कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसी क्रम में, VOC पोर्ट परिसर में केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) के शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत की गई है।

यह संस्थान न केवल पोर्ट कर्मचारियों और केंद्र सरकार के कर्मियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण CBSE शिक्षा प्रदान करेगा, बल्कि तूतीकोरिन के स्थानीय बच्चों के लिए भी शिक्षा के नए अवसर खोलेगा। मंत्री सोनोवाल ने इसे सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली उपकरण बताया।

नवाचार और तकनीक: ‘द हाइड्रोजन पिवट’ और PortGPT

VOC पोर्ट ने केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित किए हैं:

  1. IIM कलकत्ता केस स्टडी: मंत्री सोनोवाल ने “द हाइड्रोजन पिवट: ऑर्केस्ट्रेटिंग द ग्रीन ट्रांजिशन एट वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी” नामक केस स्टडी का विमोचन किया। यह अध्ययन बताता है कि कैसे पोर्ट ने पारंपरिक कार्गो हब से हरित ऊर्जा और ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
  2. PortGPT ऐप: VOC पोर्ट भारत का पहला ऐसा बंदरगाह बन गया है जिसने PortGPT मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। यह एंटरप्राइज-ग्रेड जेनरेटिव AI प्लेटफॉर्म बंदरगाह के डेटा-संचालित निर्णय लेने और परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

भविष्य की तैयारी: सहयोग और अनुसंधान

दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए, VOC पोर्ट अथॉरिटी ने गति शक्ति विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य है:

  • अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना।
  • लॉजिस्टिक्स शिक्षा और कौशल विकास।
  • ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स एंड पोर्ट मैनेजमेंट’ की स्थापना करना।

निष्कर्ष

VOC पोर्ट का यह रूपांतरण यह साबित करता है कि जब बुनियादी ढांचा, नवाचार और समुदाय का मेल होता है, तो विकास न केवल तेज होता है, बल्कि वह टिकाऊ भी होता है। यह बंदरगाह अब न केवल भारत, बल्कि दुनिया के लिए एक उदाहरण है कि कैसे जिम्मेदारी के साथ समुद्री विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर सचिव विजय कुमार और VOCPA के अध्यक्ष सुसांत कुमार पुरोहित सहित मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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