अलास्का से क्यों ले गए बॉडीगार्ड्स रूसी राष्ट्रपति का मल?

अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी तीन घंटे की बैठक ने वैश्विक सुर्खियां बटोरीं, लेकिन एक अजीबोगरीब खबर ने सबका ध्यान खींचा। खबरों के मुताबिक, पुतिन अपने साथ एक खास 'पूप सूटकेस' लेकर अलास्का पहुंचे, जिसमें उनके बॉडीगार्ड्स उनके मल को इकट्ठा करते थे।

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नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हालिया अमेरिका दौरा कई कारणों से चर्चा में रहा। अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी तीन घंटे की बैठक ने वैश्विक सुर्खियां बटोरीं, लेकिन एक अजीबोगरीब खबर ने सबका ध्यान खींचा। खबरों के मुताबिक, पुतिन अपने साथ एक खास ‘पूप सूटकेस’ लेकर अलास्का पहुंचे, जिसमें उनके बॉडीगार्ड्स उनके मल को इकट्ठा करते थे। यह सुनने में जितना अटपटा लगता है, इसके पीछे एक गंभीर और रणनीतिक मकसद छिपा है।

क्यों चाहिए ‘पूप सूटकेस’?

इस असामान्य कदम के पीछे की वजह पुतिन की सेहत से जुड़ी गोपनीयता है। कई सालों से ऐसी अफवाहें हैं कि 72 साल के पुतिन किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो सकती है। इन अफवाहों को हवा तब मिली, जब 2023 में बेलारूस के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात में पुतिन को असामान्य रूप से हिलते-डुलते देखा गया। हालांकि, क्रेमलिन ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन पुतिन की सेहत को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यही वजह है कि पुतिन और उनकी सुरक्षा टीम यह सुनिश्चित करती है कि उनका जैविक कचरा – खासकर मल – विदेशी धरती पर न छूटे, ताकि कोई उनकी स्वास्थ्य स्थिति का विश्लेषण न कर सके।

बॉडीगार्ड्स की खास जिम्मेदारी

2007 के बाद पहली बार अमेरिका पहुंचे पुतिन की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे। उनकी रक्षा के लिए चारों तरफ रूसी फेडरल प्रोटेक्शन सर्विस (FPS) के जवान तैनात थे। इनमें से कुछ के पास एक विशेष सूटकेस था, जिसमें पुतिन का मल एक खास थैली में जमा किया जाता था। इस सूटकेस को बाद में रूस वापस ले जाया गया। यह प्रथा नई नहीं है। फ्रांसीसी पत्रिका ‘पैरिस मैच’ के मुताबिक, 2017 में फ्रांस दौरे और 2018 में विएना यात्रा के दौरान भी पुतिन की टीम ने ऐसा ही किया था। विएना में तो पुतिन ने एक पोर्टेबल टॉयलेट का इस्तेमाल किया था, ताकि उनका जैविक कचरा पूरी तरह नियंत्रित रहे।

गोपनीयता या सनक?

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन ने 1999 में रूस की सत्ता संभालने के बाद से ही यह सावधानी बरतनी शुरू की थी। इसका मकसद है विदेशी खुफिया एजेंसियों को उनके स्वास्थ्य की जानकारी हासिल करने से रोकना। मल और मूत्र जैसे जैविक नमूनों से किसी व्यक्ति की सेहत, आहार और यहां तक कि मानसिक स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है। पुतिन की यह सतर्कता उनकी सत्ता और छवि को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उनकी सनक को भी दर्शाता है, क्योंकि ऐसी गोपनीयता विश्व नेताओं में असामान्य है।

सोशल मीडिया पर मजाक का विषय

पुतिन के इस ‘पूप सूटकेस’ ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। लोगों ने इसे लेकर मजेदार टिप्पणियां कीं। एक यूजर ने लिखा, जब बाकी नेता न्यूक्लियर कोड ले जाते हैं, पुतिन अपने मल का सूटकेस ले जाते हैं। दूसरे ने तंज कसा, ट्रंप को डील नहीं मिली, और पुतिन का मल भी बॉडीगार्ड्स ले गए!। लेकिन इन मजाकों के बीच यह सवाल गंभीर है कि आखिर पुतिन अपनी सेहत को लेकर इतने परेशान क्यों हैं? क्या वाकई उनकी सेहत इतनी नाजुक है कि उन्हें ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं?

वैश्विक मंच पर चर्चा

पुतिन और ट्रंप की अलास्का में मुलाकात रूस-यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के लिए थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। फिर भी, इस ‘पूप सूटकेस’ की खबर ने वैश्विक मंच पर एक अलग तरह की चर्चा छेड़ दी। यह घटना न सिर्फ पुतिन की गोपनीयता की चाहत को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वैश्विक नेता अपनी छवि और सुरक्षा को लेकर कितने असामान्य कदम उठा सकते हैं। गैलापागोस की जैव विविधता हो या पुतिन का यह विचित्र प्रोटोकॉल, दुनिया के सामने अब चुनौतियां और रहस्य दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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