नई दिल्ली: हम अपने घरों और वाहनों को स्वच्छ और सुरक्षित मानते हैं, लेकिन हाल के एक शोध ने हैरान करने वाली सच्चाई उजागर की है। हमारे आसपास की हवा, खासकर बंद जगहों जैसे घर और कारों में, सूक्ष्म माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) कणों से भरी हुई है। ये कण इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आंखों से देखना असंभव है, लेकिन हम हर सांस के साथ इन्हें अपने शरीर में ले रहे हैं।
30 जुलाई, 2025 को प्लोस वन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, 1 से 10 माइक्रोमीटर के आकार वाले माइक्रोप्लास्टिक कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। फ्रांस के टूलूज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग कर इन कणों की मौजूदगी का पता लगाया। ये कण सांस संबंधी समस्याओं, पाचन विकारों, प्रजनन क्षमता में कमी और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस अध्ययन ने कई अहम सवाल उठाए हैं, हमारी सांसों में कितना प्लास्टिक मौजूद है? और इसका हमारे स्वास्थ्य पर लंबे समय तक क्या असर हो सकता है?
शोध के निष्कर्ष
शोधकर्ताओं ने 16 अपार्टमेंट और कारों के अंदर की हवा के नमूनों को एकत्र कर माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा का विश्लेषण किया। रमन माइक्रो-स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिए उन्होंने पाया कि रोजमर्रा के वातावरण में दिखाई न देने वाले प्लास्टिक कण बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
परिणाम चौंकाने वाले
घरों में प्रति घन मीटर हवा में औसतन 528 माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए, जबकि कारों में यह संख्या 2,238 थी, जो घरों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 90% से ज्यादा कण 10 माइक्रोमीटर से छोटे थे, जो आसानी से फेफड़ों के गहरे ऊतकों तक पहुंच सकते हैं।
अध्ययन के अनुसार, सामान्य वेंटिलेशन और सांस लेने की प्रक्रिया के आधार पर, एक वयस्क व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 68,000 माइक्रोप्लास्टिक कण सांस के जरिए लेता है। इसके अलावा, 10-300 माइक्रोमीटर आकार के 3,200 अतिरिक्त कण भी शरीर में प्रवेश करते हैं। चूंकि लोग अपना 90% समय घर के अंदर बिताते हैं, इसलिए यह जोखिम और भी गंभीर हो जाता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
ये सूक्ष्म माइक्रोप्लास्टिक कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों के ऊतकों और रक्तप्रवाह में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। एक बार शरीर में पहुंचने के बाद, ये कण सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव, कोशिका क्षति और प्रतिरक्षा प्रणाली में रुकावट पैदा कर सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक में अक्सर थैलेट्स, बिस्फेनॉल ए (बीपीए) और भारी धातुओं जैसे जहरीले पदार्थ होते हैं, जो ऊतकों में रिसकर हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन समस्याएं, चयापचय विकार और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। कुछ अन्य अध्ययनों में मानव मस्तिष्क और प्लेसेंटा में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं, जो दर्शाता है कि ये कण सांस के जरिए विभिन्न अंगों में जमा हो सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत
घर और कारों में माइक्रोप्लास्टिक कई रोजमर्रा की चीजों से उत्पन्न होते हैं। इनमें सिंथेटिक कपड़े जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन और ऐक्रेलिक से बने कालीन, परदे और कपड़े शामिल हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की पैकेजिंग, कंटेनर और घर की धूल भी इन कणों के स्रोत हैं। कारों में डैशबोर्ड, सीट कवर और अन्य हिस्सों में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी और एबीएस प्लास्टिक भी माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं। रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे कपड़े तह करना, कालीन पर चलना या कार चलाना भी हवा में इन कणों को फैलाती हैं।
समय के साथ, गर्मी, घर्षण और क्षरण के कारण ये सामग्रियां सूक्ष्म कणों में टूटकर हवा में मिल जाती हैं। अध्ययन में पाया गया कि कारों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक होने का कारण सीमित स्थान, उच्च तापमान और सिंथेटिक सामग्रियों का व्यापक उपयोग हो सकता है। खराब वेंटिलेशन के कारण कारों में ये कण तेजी से जमा हो सकते हैं, जिससे सांस संबंधी जोखिम बढ़ता है, खासकर बच्चों और फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए।
माइक्रोप्लास्टिक से बचाव के उपाय
माइक्रोप्लास्टिक के खतरे को कम करने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना, पुन: उपयोग होने वाले कंटेनर और बोतलों का इस्तेमाल करना, और कपड़े के शॉपिंग बैग, बांस की कटलरी या धातु की पानी की बोतलों को प्राथमिकता देना चाहिए। प्लास्टिक में खाना गर्म करने से बचें और इसके बजाय कांच या सिरेमिक बर्तनों का उपयोग करें।
घर के अंदर हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एचईपीए फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। नियमित रूप से एचईपीए फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर से सफाई करें ताकि प्लास्टिक युक्त धूल को कम किया जा सके। फर्नीचर और कपड़ों में प्राकृतिक रेशों जैसे कपास और ऊन का उपयोग करें। कारों को नियमित रूप से साफ करें और अच्छा वेंटिलेशन सुनिश्चित करें। प्लास्टिक को माइक्रोवेव या गर्मी के अन्य स्रोतों के पास गर्म करने से बचें। हालांकि, माइक्रोप्लास्टिक से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन इन उपायों से सांस के जरिए इनके शरीर में प्रवेश को कम किया जा सकता है।



