Trump के टैरिफ से तनाव में भारत-अमेरिका संबंध, बनेगा भारत-रूस-चीन का त्रिकोण?

विशेषज्ञ मानते हैं कि टैरिफ नीति अगर लंबे समय तक लागू रही, तो भारत को अपने निर्यात बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की जरूरत होगी।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने 1 अगस्त, 2025 से भारत के आयात पर 25% टैरिफ और रूस से तेल व हथियार खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की है। यह कदम भारत-अमेरिका के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को गहरा झटका दे सकता है।
दोनों देश हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे थे, लेकिन यह नई नीति आपसी विश्वास को कमजोर कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टैरिफ नीति लंबे समय तक लागू रही, तो भारत को अपने निर्यात बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की जरूरत होगी, जिससे यूरोप, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार पर प्रभाव
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत कई अमेरिकी उत्पादों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य उपकरण और कृषि वस्तुओं पर 30-60% तक टैरिफ लगाता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत अपने बाजार को आंशिक रूप से बंद रखता है, जबकि अमेरिकी बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खुला है। इस टैरिफ से भारत के श्रम-प्रधान उद्योगों जैसे कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और आभूषण को भारी नुकसान हो सकता है, वहीं अमेरिका के रक्षा, कृषि और तकनीकी क्षेत्र भी प्रभावित हो सकते हैं।

भारत से अमेरिका को निर्यात

  • फार्मास्यूटिकल्स (जेनेरिक दवाएं): भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं की सबसे बड़ी आपूर्ति करता है। टैरिफ से इन दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर बोझ पड़ेगा। भारतीय फार्मा उद्योग को भी आर्थिक नुकसान होगा।
  • कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स: अमेरिका भारतीय वस्त्रों का प्रमुख बाजार है। 25% टैरिफ से भारतीय कपड़े महंगे हो जाएंगे, जिससे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को फायदा हो सकता है। यह उद्योग भारत में लाखों नौकरियां देता है।
  • रत्न और आभूषण: अमेरिका भारतीय हीरे और आभूषणों का सबसे बड़ा खरीदार है। टैरिफ से मांग घट सकती है, जिससे सूरत और मुंबई जैसे केंद्र प्रभावित होंगे।
  • स्टील और एल्यूमिनियम: भारत का स्टील निर्यात अमेरिका में पहले ही सीमित है, और टैरिफ इसे पूरी तरह अप्रतिस्पर्धी बना सकता है।

अमेरिका से भारत को आयात

  • रक्षा उपकरण और बोइंग विमान: भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण और यात्री विमान खरीदता है। यदि भारत जवाबी टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी रक्षा उद्योग को नुकसान हो सकता है और ऑर्डर रद्द हो सकते हैं।
  • आईटी हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर: जवाबी कार्रवाई से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन तकनीकी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी।
  • कृषि और खाद्य उत्पाद: अमेरिका से भारत में बादाम, ब्लूबेरी और शराब का आयात होता है। जवाबी टैरिफ से इनकी बिक्री घट सकती है और भारतीय रिटेल में कीमतें बढ़ सकती हैं।

व्यापार और रणनीतिक संबंधों पर असर
यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स का अनुमान है कि भारत-अमेरिका व्यापार 2025-26 में 170 अरब डॉलर से घटकर 150 अरब डॉलर हो सकता है। रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर विश्वास कम हो सकता है। भारत को वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी पड़ सकती है, जिससे यूरोप, मध्य पूर्व और आसियान देशों के साथ व्यापार बढ़ सकता है। ट्रंप के इस कदम से भारत रूस और चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर विचार कर सकता है, खासकर रूस से तेल और हथियार खरीद को लेकर।

ट्रंप के भारत पर नाराजगी की कई वजहें

  • व्यापार घाटा: 2024 में अमेरिका का भारत के साथ 45.7 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा था। ट्रंप का मानना है कि भारत के उच्च टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं इसके लिए जिम्मेदार हैं।
  • रूस के साथ संबंध: भारत का रूस से तेल (35% आयात) और सैन्य उपकरणों की खरीद अमेरिका को पसंद नहीं है, खासकर यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में।
  • ब्रिक्स समूह: ट्रंप ब्रिक्स को अमेरिका-विरोधी मानते हैं और भारत की इसमें सदस्यता को लेकर नाराज हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाएं अमेरिकी हितों से टकरा रही हैं, क्योंकि ये भारत में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देती हैं।
  • सीजफायर विवाद: ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर का श्रेय लेने की कोशिश की, लेकिन भारत के इनकार से उनकी नाराजगी बढ़ी।

भारत की जवाबी रणनीति
भारत ने कहा है कि वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिका को चीन के मुकाबले रणनीतिक साझेदार माना है, लेकिन कृषि, डेटा गवर्नेंस और सब्सिडी नीतियों को बनाए रखने पर जोर दिया है। भारत जवाबी टैरिफ लगा सकता है, खासकर अमेरिकी रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और कृषि उत्पादों पर। इसके अलावा, भारत यूरोप और आसियान देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर नुकसान को कम करने की कोशिश कर सकता है।
ट्रंप के टैरिफ और जुर्माने से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। भारत को अपनी रणनीति में संतुलन बनाना होगा, जिसमें जवाबी कार्रवाई, नए व्यापारिक साझेदारों की तलाश और घरेलू उद्योगों को मजबूत करना शामिल है। यह टैरिफ युद्ध न केवल व्यापार, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे रूस और चीन के साथ निकटता बढ़ने की संभावना है।

विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने ट्रंप के इस कदम को पीएम मोदी की विदेश नीति की नाकामी करार दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, मोदी की ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसी कूटनीति बेकार साबित हुई। ट्रंप की दोस्ती के दावों के बावजूद भारत को आर्थिक झटका मिला है। यह अमेरिका की ब्लैकमेलिंग है, जिससे भारत को बचना होगा।

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