नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों से इजरायल और हमास (Israel-Hamas Conflict) के बीच चल रहा हिंसक टकराव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। इस जटिल और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अब अमेरिका (US Foreign Policy) ने हस्तक्षेप करते हुए शांति बहाली की दिशा में पहल की है।
ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस संकट को समाप्त करने के लिए एक 20 बिंदुओं वाली शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। ट्रंप का मानना है कि यदि दोनों पक्ष योजना को स्वीकार करते हैं, तो मिडिल ईस्ट में स्थायित्व और शांति की नींव रखी जा सकती है। इस प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण शर्त है कि हमास को अपने पास रखे सभी 48 बंधकों को बिना शर्त रिहा करना होगा।
मार्को रूबियो का बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि अमेरिका किसी राजनीतिक संगठन से नहीं, बल्कि खतरनाक आतंकवादी समूहों से निपट रहा है। उनका कहना है कि युद्ध के माहौल में बंधकों की रिहाई असंभव है, इसलिए सबसे पहले बमबारी रोकनी होगी। उन्होंने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाएं।
सोशल मीडिया पर सख्त संदेश
रूबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अमेरिका उन लोगों के साथ खड़ा नहीं हो सकता जो निर्दोषों की हत्या करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक ऐसे गठबंधन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संघर्ष को खत्म कर बंधकों को छुड़ाना है।
हमास को ट्रंप की चेतावनी
इससे पहले ट्रंप ने हमास को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वह प्रस्तावित शांति योजना पर गंभीरता से विचार करे, क्योंकि देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी कुछ शर्तों में लचीलापन दिखाने को तैयार है और अब जवाब हमास की तरफ से आना बाकी है।
आगे की संभावनाएं
अगर हमास शांति योजना को स्वीकार करता है, तो तुरंत युद्धविराम लागू किया जाएगा और बंधकों की अदला-बदली शुरू हो जाएगी। इसके बाद द्विपक्षीय बातचीत के अगले चरण की शुरुआत होगी, जो संभवतः इस ऐतिहासिक संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में पहला बड़ा कदम होगा।
ट्रंप की यह पहल मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद जगा रही है। हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका की सक्रिय भूमिका इस बार समाधान की संभावनाओं को मजबूत बना रही हैं।



