नई दिल्ली: Israel के हाइफा शहर ने सोमवार को भारतीय शहीद सैनिकों (Indian Soldiers) की वीरता को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित समारोह में शहर के मेयर योना याहाव ने बड़ा ऐलान किया कि हाइफा (Haifa) की स्कूल पाठ्यपुस्तकों में अब यह तथ्य दर्ज किया जाएगा कि शहर को ओटोमन शासन से मुक्त कराने वाले ब्रिटिश सैनिक नहीं, बल्कि भारतीय सैनिक थे।
बदल रहा है इतिहास का ज़िक्र
मेयर याहाव ने कहा कि बचपन से उन्हें यही सिखाया गया कि ब्रिटिश सेना ने हाइफा को आजाद कराया था, लेकिन ऐतिहासिक शोध ने इस तथ्य को उजागर किया कि असल में भारतीय घुड़सवार रेजिमेंटों ने 1918 में शहर को ओटोमन साम्राज्य से मुक्त कराया था। उन्होंने कहा, “हर स्कूल में हम पाठ्यपुस्तकों को बदल रहे हैं और लिख रहे हैं कि हमें ब्रिटिश नहीं, भारतीय सैनिकों ने आजाद कराया।”
वीरता की अद्भुत कहानी
प्रथम विश्व युद्ध (World War I) के दौरान भारतीय सैनिकों ने भालों और तलवारों से लैस होकर ओटोमन सेना से मुकाबला किया। तमाम बाधाओं को पार करते हुए भारतीय घुड़सवारों ने माउंट कार्मेल की खड़ी ढलानों पर चढ़ाई की और हाइफा को आजादी दिलाई। युद्ध विशेषज्ञ इसे इतिहास का अंतिम महान घुड़सवार अभियान मानते हैं।
भारतीय रेजिमेंटों का योगदान
23 सितंबर 1918 को मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लांसर्स की तीन बहादुर भारतीय रेजिमेंटों ने 15वीं इंपीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड के तहत आक्रामक कार्रवाई की थी। इस अभियान में भारतीय सैनिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लड़ाई लड़ी और शहर को ओटोमन सेना से छुड़ाया।
हाइफा दिवस पर भारतीय सेना की श्रद्धांजलि
भारतीय सेना हर साल 23 सितंबर को ‘हाइफा दिवस’ के रूप में मनाती है। इस दिन उन शहीद भारतीय सैनिकों को याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी वीरता से हाइफा की आजादी सुनिश्चित की। भारत और इजरायल दोनों ही देशों के लिए यह दिन उनके ऐतिहासिक और गहरे संबंधों का प्रतीक बन गया है।
युवाओं में जागरूकता
मेयर याहाव ने बताया कि 2009 में पहली बार उन्होंने इस सत्य को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने का संकल्प लिया था और आज यह हाइफा के युवाओं के बीच एक जाना-पहचाना तथ्य है। अब आने वाली पीढ़ियाँ जानेंगी कि उनकी आजादी के पीछे भारतीय सैनिकों की कुर्बानी रही है।
- इसको भी पढ़ें: Israel हमले पर Qatar आग बबूला, UAE ने भी जताया समर्थन
हाइफा का यह कदम न केवल भारतीय सैनिकों के शौर्य को सम्मान देता है, बल्कि इतिहास को सही रूप में प्रस्तुत करने का भी प्रतीक है। यह पहल भारत-इजराइल संबंधों (India-Israel Relations) को और मजबूत करती है और आने वाली पीढ़ियों को सत्य की पहचान कराती है।



