नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) ने आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सीधे नाम लिए बिना पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र करार दिया। इस बयान के बाद पाकिस्तान ने आपत्ति जताई, लेकिन भारत (India) ने तुरंत और सटीक जवाब देकर अपने रुख को और स्पष्ट कर दिया।
जयशंकर का भाषण
विदेश मंत्री जयशंकर (S Jaishankar) ने अपने संबोधन की शुरुआत आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास इन तीन सिद्धांतों पर जोर देते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत में निर्माण, नवाचार और डिजाइन न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद है।
आत्मनिर्भरता: क्षमताओं और प्रतिभा को निखारना।
आत्मरक्षा: आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता और विदेशों में भारतीय समुदाय की रक्षा।
आत्मविश्वास: भारत अपनी स्वतंत्र पसंद बनाए रखेगा और मजबूत भविष्य गढ़ेगा।
आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि आजादी के बाद से भारत आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या का उदाहरण दिया और कहा कि भारत अपने नागरिकों की रक्षा करने और दोषियों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके इस बयान से पाकिस्तान तिलमिला गया और भारत पर झूठे आरोप लगाने का आरोप जड़ दिया।
भारत का जवाब
पाकिस्तानी प्रतिनिधि की आपत्ति का जवाब देते हुए भारत के स्थायी मिशन में द्वितीय सचिव रेंताला श्रीनिवास ने कहा कि यह विडंबना है कि बिना नाम लिए पाकिस्तान खुद को ही कटघरे में खड़ा कर बैठा। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और इसकी बदनामी पूरी दुनिया के सामने है। कोई भी तर्क आतंकवादियों के अपराध को छिपा नहीं सकता।
संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर भारत का रुख
जयशंकर ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्य देशों की संख्या बढ़नी चाहिए और भारत इसके लिए बड़ी जिम्मेदारियां उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सुधारों का विरोध ही UNSC की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहा है और इस नकारात्मक सोच को बदलना जरूरी है।
वैश्विक कार्यबल और नई व्यापार व्यवस्थाएं
जयशंकर ने यह भी कहा कि आने वाले समय में दुनिया को बड़े पैमाने पर वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी। अनिश्चितताओं के बावजूद नई व्यापार व्यवस्थाएं, तकनीकी सहयोग और कार्यस्थल मॉडल तेजी से उभरेंगे। उन्होंने लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत ने न केवल आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया बल्कि वैश्विक सुधारों और भविष्य की आर्थिक व्यवस्थाओं पर भी स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। पाकिस्तान के आरोपों का करारा जवाब देकर भारत ने यह संदेश दिया कि वह न केवल आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाता है, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है।



