नई दिल्ली: रूस के व्लादिवोस्तोक में शंघाई सहयोग संगठन के व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के साथ मुक्त, निष्पक्ष और समावेशी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के पक्ष में अपना रूख साफ कर दिया। बैठक में भारत ने कहा कि साझा खुशहाली के लिए शंघाई सहयोग संगठन की सामूहिक शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।
इन मुद्दों पर भारत का रहा जोर
- निर्यात में विविधता लाने
- आयात पर निर्भरता कम करने
- लचीली आपूर्ति श्रृंखला बनाने
- व्यापार प्रवाह बढ़ाने
- खामियों को दूर करने
क्षेत्र में समावेशी विकास के लिए मिलकर प्रयास करने
एससीओ में दुनिया की 42% आबादी और वैश्विक व्यापार का 17.2% हिस्सा है इसलिए भारत ने व्यापार प्रवाह बढ़ाने, कमज़ोरियों को दूर करने और पूरे क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए समन्वित कार्रवाई के महत्व पर जोर दिया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री की ओर से अपर सचिव अमिताभ कुमार ने ऐसे विकास पर बल दिया, जिसमें खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण का स्थायी समाधान शामिल हो। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के मामले में अनुकूल व्यवहार तथा विश्व व्यापार संगठन की दो-स्तर वाली विवाद निपटान प्रणाली की बहाली ज़रूरी है।
भारत ने एवीजीसी क्षेत्र को उजागर किया
भारत ने एवीजीसी क्षेत्र (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) को रोज़गार, निर्यात और समावेशी विकास के इंजन के रूप में रेखांकित किया। इसने इस वर्ष की शुरुआत में पहली बार आयोजित विश्व ऑडियो विज़ुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स 2025) की अपनी सफल मेजबानी को याद किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
भारत ने एक ठोस व्यापार और आर्थिक एजेंडा तैयार करने और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एससीओ शासनाध्यक्षों (प्रधानमंत्रियों) की परिषद की रूसी अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया।
क्या है WTO
यह एक वैश्विक संगठन है। यह देशों के बीच व्यापार के नियमों को विनियमित करता है। GATT और WTO में मुख्य अंतर यह है कि GATT जहां ज़्यादातर वस्तुओं के व्यापार को विनियमित करता था। वहीं WTO और इसके समझौतों में न केवल वस्तुओं को बल्कि सेवाओं और अन्य बौद्धिक संपदाओं जैसे- व्यापार चिन्हों, डिज़ाइनों और आविष्कारों से संबंधित व्यापार को भी शामिल किया जाता है।
164 देश है सदस्य
डब्ल्यूटीओ में यूरोपीय संघ सहित 164 सदस्य देश शामिल हैं। ईरान, इराक, भूटान, लीबिया आदि 23 देशों को पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त हैं। भारत 1947 में GATT और WTO का संस्थापक सदस्य देश बना था। डब्ल्यूटीओ में कम विकसित देशों पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाता है। सभी समझौतों में इस बात का ध्यान रखा गया है कि कम विकसित देशों को अधिक रियायत दी जानी चाहिए और जो सदस्य देश बेहतर स्थिति में हैं उन्हें कम विकसित देशों के निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने हेतु अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
चुनौतियां कम नहीं
मुक्त बाज़ार वैश्विक व्यापार प्रणाली के समक्ष चीन के राज्य-स्वामित्व वाले उद्यम एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं। इसका कारण अमेरिका और चीन के मध्य व्यापार युद्ध है। अपीलीय निकाय का संचालन दिसंबर 2019 से प्रभावी रूप से निलंबित है क्योंकि तभी से अमेरिका द्वारा अपीलीय निकाय में नियुक्तियों पर रोक लगाई जा रही है, जिसके कारण निकाय में सुनवाई करने के लिये आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो रहा है। WTO की वार्ताओं के संदर्भ में एक समस्या यह है कि WTO में शामिल विकसित या विकासशील देशों के संगठन की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है।



