पितृपक्ष मेला : गयाजी में उमड़ा आस्था का सैलाब, पूर्वजों के आत्मा की शांति के पहुंचे लाखों श्रद्धालु

गयाजी में इस वर्ष चुनावों के ठीक पहले आयोजित 16 दिनों के पितृपक्ष मेला में तीर्थयात्रियों की सुविधा-सहायता को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इस वर्ष 22 से 25 लाख श्रद्धालुओं के गया पहुंचने की उम्मीद है। सैयद खतीबुल्लाह, गुड्डू की विशेष रिपोर्ट ।

Share This Article:

गयाजी: गयाजी धाम में सतानत धर्म के लोगें का पितृपक्ष मेला चरम पर है। पिछले तीन दिनों से भगवान विष्णु की मोक्ष नगरी गयाजी में मेले की धूम है। देश दुनिया के कोने-कोने से रोजाना बड़ी संख्या में सनातनी अपने पुरखों का पिंडदान करने के लिए गयाजी धाम आ रहे हैं। अब तक लाखों श्रद्धालु गयाजी आ चुके हैं। शुरुआती तीन दिनों में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उड़ीसा और गुजरात समेत देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के श्राद्ध के लिए गयाजी पहुंच चुके हैं। मोक्षदायिनी फल्गू के घाट और प्रमुख वेदियां कर्मकांड के मंत्रों से गूंज रही हैं। यहां फल्गू महाआरती का भी इंतजाम किया गया है। गयाजी में पिंडदान के लिए 54 वेदियां हैं।

चुनावी साल में करीब 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद

चुनावी वर्ष में 22 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पिंडदान के लिए गयाजी पहुंचने की उम्मीद है। पिछले वर्ष 22 लाख श्रद्धालु पिंडदान के लिए गया पहुंचे थे। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं के रहने-ठहरने और उनकी सुरक्षा-सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किया है। चुनाव के पूर्व आयोजित होने वाले इस मेले में तीर्थयात्रियों की सुविधा-सहायता को लेकर मंत्री से लेकर संतरी तक सभी मुस्तैद हैं।

गया कॉलेज खेल परिसर में होगी वाहनों की पार्किंग

अपने वाहनों से पहुंचने वालों के लिए गया कॉलेज के खेल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जबकि गांधी मैदान में 2500 बिस्तरों के इंतजाम के साथ टेंट सिटी बनाई गई है। टेंट सिटी में रहने-ठहरने की मुफ्त व्यवस्था के साथ पटना के महावीर मंदिर द्वारा विष्णु रसोई की भी व्यवस्था की गई है। बिजली-पानी और शौचालय वगैरह के भी बेहतर इंतजाम किए गए हैं। छह हजार पुलिसकर्मियों के जिम्मे पिंडदानियों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। विष्णुपद मंदिर परिसर में अस्थायी थाना खोला गया है। गया के डीएम शशांक शुभंकर खुद सारे इंतजामों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

मेले में बनाए गए हैं 325 सेक्टर

गया स्थित विद्युत कम्पनी के अधीक्षण अभियंता संदीप प्रकाश के मुताबिक मेला क्षेत्र में 10 किमी से ज्यादा खुले-नंगे हाइ टेंशन तारों को हटाकर उनकी जगह कवर वायर लगाया गया है। बिजली व्यवस्था के रखरखाव के लिए 200 बिजली मिस्त्री भी लगाए गए हैं। अनगिनत ट्रांसफार्मर भी बदले गए हैं। सुरक्षा और सुविधा की निगरानी के लिए समूचे मेला क्षेत्र को 17 सुपर जोन, 42 जोन और 325 सेक्टर में बांटा गया है। स्वास्थ विभाग द्वारा 80 से ज्यादा हेल्थ कैम्प बनाए जाने के साथ प्रमुख अस्पतालों में पिंडदानियों के इलाज के लिए बिस्तर भी सुरक्षित किए गए हैं।

6 सितम्बर को हुआ था मेले का उदघाटन

6 सितम्बर को तामझाम के साथ बिहार के वन एंव पर्यावरण मंत्री व जिला प्रभारी मंत्री सुनील सिंह, पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह, सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार, राजस्व मंत्री संजय सरावगी, लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, विधायक दीपा मांझी, और एमएलसी आफाक अहमद आदि के अलावा गया के शीर्ष पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में मेला का विधिवत उदघाटन किया गया था। वर्ष 2015 में गया के पितृपक्ष मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद से मेले का सारा इंतजाम प्रशासन के जिम्मे है। इसके लिए नगर निगम और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा विशेष निधि का भी इंतजाम किया जाता है। इस मौके पर पर्यटन मंत्री ने इसे अंतर्राष्ट्रीय मेला घोषित किए जाने का भी आश्वासन दिया है। नेताओं ने कहा कि पितृपक्ष मेला शुरु होने के पहले ही राज्य सरकार ने गया का नाम बदलकर गयाजी कर दिया था। मंत्री प्रेम कुमार ने बताया कि सरकार ने गया के 80 हजार घरों में गंगा जल पहुंचा दिया है। फल्गू नदी में जल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रबर डैम भी बनाया जा चुका है। 21 सितम्बर तक चलने वाले इस मेले में रात के समय गयाजी की गलियों और चौक-चौराहे रौशनी से जगमग हैं। प्रशासन की ओर से विष्णुपद मंदिर परिसर स्थित मुख्य पंडाल में मेलावधि के दौरान मोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है।

गयाधाम में हैं 54 वेदियां

 विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल बिट्ठल और सचिव गजाधर लाल पाठक की मानें तो 1980 से गयाधाम की अधिकांश पिंडवेदियों की साफ सफाई और रंगाई पुताई का काम डालमिया परिवार करता रहा है। वर्ष 2014 के नवम्बर में धर्मपरायण शिवराम डालमिया के निधन के बाद उनकी पत्नी उषा डालमिया भक्तिभाव से पिंडवेदियों की सफाई करवाती रही हैं। गयाजी की 54 में से 45 पिंडवेदियों पर मुख्य रूप से पिंडदान होता रहा है, इनमें गयासिर वेदी, कागबलि वेदी, भीमगया वेदी, आम्रसिंचन वेदी और तारक ब्रह्म वेदी प्रमुख हैं।

वैदिक काल में शुरु हुई थी गया में पिंडदान की परम्परा

मान्यता है कि गया में पिंडदान की परम्परा वैदिक काल में शुरु हुई थी। महाभारत के योद्धा पांडवों के अलावा प्रभु श्रीराम ने भी अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान गया में किया था। स्कंद पुराण, वायु पुराण और रामायण महाभारत आदि कई हिंदु ग्रंथों में गया जी की महिमा अंकित है। गया असुर के नाम से इस प्राचीन शहर का नाम पड़ा था। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गया असुर के सीने पर पैर रखकर उसे मुक्ति दी थी। तब से ही गया में पिंडदान और पितरों की मुक्ति का चलन शुरु हुआ था।  

परिवहन के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग की सुविधा  

पितृपक्ष मेले को लेकर गया पहुंचने के लिए स्पेशल रेलगाडियां चल रही हैं तो गया एयरपोर्ट से कोलकाता दिल्ली के लिए प्रतिदिन 2-2 फ्लाइट भी है। वैसे जीटी रोड से भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश आदि से गया पहुंचते हैं। शहर में पिंडदानियों के लिए ऑटो और ई-रिक्शे की सुविधा है। प्रशासन ने किराया भी तय कर दिया है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पितृपक्ष मेले का एप्प भी जारी किया गया है, जिससे सुविधा-शिकायत को लेकर अधिकारियों से तीर्थयात्रियों का सम्पर्क हो सके।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.