नई दिल्ली: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickremesinghe) को शुक्रवार को सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप है कि 2023 में अपनी पत्नी प्रोफेसर मैत्री विक्रमसिंघे के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए लंदन की निजी यात्रा के लिए सरकारी खजाने का उपयोग किया गया। यह पहली बार है जब श्रीलंका के किसी पूर्व राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया गया है, जिसने देश में सनसनी मचा दी है।
लंदन यात्रा पर सवाल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रमसिंघे सितंबर 2023 में क्यूबा में जी-77 शिखर सम्मेलन और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद लंदन रुके थे। वहां उन्होंने अपनी पत्नी के वॉल्वरहैम्प्टन विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में हिस्सा लिया, जहां उन्हें मानद प्रोफेसरशिप प्रदान की गई थी। आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) का दावा है कि इस निजी यात्रा के लिए करीब 1.7 करोड़ श्रीलंकाई रुपये (लगभग 57,000 अमेरिकी डॉलर) सरकारी खजाने से खर्च किए गए। इसके अलावा, उनके निजी सुरक्षाकर्मियों का खर्च भी सरकार ने वहन किया।
गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी
शुक्रवार सुबह विक्रमसिंघे कोलंबो में वित्तीय अपराध जांच विभाग (एफसीआईडी) के सामने पेश हुए, जहां उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 26 अगस्त तक हिरासत में रखने का आदेश दिया। विक्रमसिंघे ने स्वास्थ्य आधार पर जमानत की मांग की थी, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। उनके समर्थकों ने कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
विक्रमसिंघे का पक्ष
विक्रमसिंघे और उनकी पार्टी, यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी), ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनके कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि मैत्री विक्रमसिंघे ने अपनी यात्रा का खर्च स्वयं वहन किया था, और पूर्व राष्ट्रपति ने किसी भी सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं किया। यूएनपी के नेता निशांत वर्णसिंघे ने कहा, रानिल विक्रमसिंघे ने 2022 की आर्थिक मंदी में देश को संकट से उबारा। यह गिरफ्तारी नए प्रशासन की बदले की कार्रवाई है।
जांच का दायरा
सीआईडी ने इस मामले में पहले ही विक्रमसिंघे के पूर्व निजी सचिव सैंड्रा परेरा और पूर्व राष्ट्रपति सचिव समन एकनायके से पूछताछ की थी। जांच में सामने आया कि लंदन यात्रा में 10 लोगों का समूह शामिल था, और इस दौरान कोई आधिकारिक सरकारी बैठक नहीं हुई थी। सीआईडी ने जून 2025 में इस मामले की जांच शुरू की थी और कोर्ट में प्रारंभिक सबूत पेश किए थे।
विक्रमसिंघे का राजनीतिक सफर
76 वर्षीय रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं। उन्होंने 1993 से 2022 तक छह बार प्रधानमंत्री का पद संभाला और 2022 में गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति बने। 2022 की आर्थिक मंदी के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 2.9 बिलियन डॉलर का बेलआउट हासिल किया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था स्थिर हुई। हालांकि, उनकी कठोर आर्थिक नीतियों और पूर्ववर्ती सरकार से नजदीकी के कारण जनता में असंतोष बढ़ा, और सितंबर 2024 में वे राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके से हार गए।
भ्रष्टाचार विरोधी अभियान
विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी राष्ट्रपति दिसानायके के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिन्होंने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया था। पिछले छह महीनों में 60 से अधिक राजनेताओं, उनके रिश्तेदारों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लिया गया है। विक्रमसिंघे की गिरफ्तारी को श्रीलंका की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना माना जा रहा है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाती है।
जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
विक्रमसिंघे के समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि कई नागरिकों का मानना है कि यह जवाबदेही की दिशा में सकारात्मक कदम है। राजनीतिक विश्लेषक प्रियंका जोशी ने कहा, यह गिरफ्तारी श्रीलंका की जनता के लिए एक मजबूत संदेश है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। लेकिन, इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी हो सकती है। श्रीलंका में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और अगली सुनवाई में कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस घटना ने देश में भ्रष्टाचार और शासन की पारदर्शिता पर बहस को और तेज कर दिया है।



