नई दिल्ली: उत्तराखंड (Uttarakhand) एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। चमोली जिले के थराली में शुक्रवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मची, जिसने स्थानीय लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। इससे पहले उत्तरकाशी के धराली में हुई आपदा ने राज्य को हिलाकर रख दिया था। थराली में भारी बारिश और मलबे के बहाव ने घरों, दुकानों और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में एक युवती की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
थराली में बादल फटने से हाहाकार
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के अनुसार, थराली में 22-23 अगस्त की रात को भारी बारिश हुई, जिसमें 24 घंटे में 140 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई। यह बारिश बादल फटने की श्रेणी में नहीं आती, लेकिन टूनरी गदेरे में अचानक उफान ने क्षेत्र को तबाह कर दिया। रात करीब 1 बजे मूसलाधार बारिश के साथ मलबा बहकर आया, जिसने थराली बाजार, चेपडो, कोटदीप, और सागवाड़ा जैसे इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। कई घरों में 1-2 फीट तक मलबा घुस गया, और कुछ वाहन भी मलबे में दब गए। सागवाड़ा गांव में 20 वर्षीय कविता नाम की युवती मलबे में दबकर मृत पाई गई, जिसका शव एसडीआरएफ ने बरामद किया। एक अन्य व्यक्ति की तलाश जारी है।
राहत और बचाव कार्य तेज
चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि राहत कार्यों की निगरानी के लिए वह स्वयं मौके पर मौजूद हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, और बीआरओ की टीमें मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। छह गंभीर रूप से घायल लोगों को हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेजा गया है, जबकि 25 से अधिक लोगों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है। थराली के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज और शहीद भवानीदत्त इंटर कॉलेज में राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। भारी बारिश की चेतावनी के चलते थराली, देवाल, और नारायणबगड़ में शनिवार को स्कूल बंद रहे।
धराली में भी आपदा का दंश
इससे पहले, 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। वहां 4 लोगों की मौत हुई और 50 से अधिक लोग लापता बताए गए। धराली में मलबे ने कई होटल, होमस्टे, और घरों को जमींदोज कर दिया। भारतीय सेना, एनडीआरएफ, और एसडीआरएफ की टीमें वहां भी राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कों ने बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। गंगोत्री नेशनल हाईवे के कई हिस्से टूट चुके हैं, जिससे धराली का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
स्थानीय लोगों की आपबीती
थराली के निवासी प्रकाश सिंह ने बताया, शुक्रवार रात से बारिश इतनी तेज थी कि गदेरे उफान पर आ गए। पिंडर नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। हमने पूरी रात जागकर काटी, क्योंकि डर था कि कहीं मलबा घरों में न घुस जाए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में थराली में फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे लोग दहशत में हैं। सागवाड़ा की एक अन्य निवासी अनीता देवी ने कहा, हमारा घर मलबे से भर गया। कुछ भी नहीं बचा। प्रशासन मदद कर रहा है, लेकिन डर अभी भी बना हुआ है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में अगले 48 घंटों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से नदियों और गदेरों से दूर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड में बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ रही हैं।
प्रशासन की सक्रियता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों आपदाओं पर दुख जताया और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्यों के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। उत्तरकाशी में स्यानाचट्टी के पास यमुना नदी में बनी अस्थाई झील को नियंत्रित ब्लास्ट के जरिए खोला गया, जिससे स्थिति सामान्य होने लगी है। चमोली और उत्तरकाशी में नुकसान का आकलन शुरू हो गया है, और प्रभावित लोगों को जल्द मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है।
जल निकासी, भूस्खलन और मौसम निगरानी पर ध्यान दें
उत्तराखंड में बार-बार होने वाली इन आपदाओं ने बुनियादी ढांचे और स्थानीय समुदायों पर गहरा असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम, भूस्खलन रोकथाम, और बेहतर मौसम निगरानी प्रणाली पर ध्यान देना होगा। फिलहाल, प्रशासन और सेना की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में जुटी है, लेकिन बारिश का सिलसिला थमने तक चुनौतियां बनी रहेंगी।



