नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजधानी ढाका के उत्तरा इलाके में चीन निर्मित एफ-7 बीजीआइ प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त (Dhaka Plane Crash) होने के बाद देश में रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और नीति को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। इस हादसे में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे और शिक्षक शामिल हैं।
विमान ने 21 जुलाई को दोपहर 1:06 बजे उड़ान भरी थी, लेकिन महज 25 मिनट बाद ही यह माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज की इमारत से टकरा गया। इस दुखद हादसे ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (Bangladesh Government) की चीन पर अत्यधिक सैन्य निर्भरता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
चीन पर निर्भरता पर उठे सवाल
जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘यूरेशिया रिव्यू’ के एक विश्लेषण में बांग्लादेश की रक्षा नीति को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह हादसा बांग्लादेश (Bangladesh) और चीन के बीच उस “खतरनाक गठबंधन” की ओर इशारा करता है जिसकी नींव सैन्य तानाशाह जियाउर रहमान के दौर में पड़ी थी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हादसे के बावजूद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने 16 नए जेएफ-10सी बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान खरीदने के लिए चीन से सौदा किया है, जिसे “गंभीर लापरवाही” बताया गया है।
पुराने विमान, बार-बार दुर्घटनाएं
बांग्लादेश वायु सेना के करीब 40 एफ-7 बीजीआइ विमान, जो सभी चीन से खरीदे गए हैं, पहले भी कई बार दुर्घटनाओं में शामिल रहे हैं। एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी ने गुमनाम रहते हुए बताया कि चीन निर्मित विमानों की विश्वसनीयता को लेकर लंबे समय से संदेह बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार उन्हें उपकरणों पर निर्भर है।
स्थानीय लोगों में रोष
इस दुर्घटना के बाद सोशल मीडिया पर स्थानीय छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने गुस्से और दुख के साथ सरकार से जवाब मांगा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि बच्चों से भरी इमारत के पास इतने जोखिम भरे सैन्य अभ्यास की अनुमति क्यों दी गई।
सरकार पर विपक्ष का हमला
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने सरकार की रक्षा नीतियों और सुशासन की कमी को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही दुर्घटनाएं दिखाती हैं कि देश में न तो प्रभावी प्रशासन है और न ही जवाबदेही।
ढाका का यह विमान हादसा सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि एक नीतिगत चूक का बड़ा प्रतीक बनकर सामने आया है। 35 मासूम जानें गंवाने के बाद अब बांग्लादेश में यह सवाल जोर पकड़ रहा है-क्या सस्ते चीनी उपकरणों की कीमत देश की सुरक्षा और नागरिकों की जान से चुकाई जानी चाहिए? अब निगाहें हैं यूनुस सरकार और बांग्लादेश की सैन्य रणनीति पर, जो भविष्य की दिशा तय करेगी।



