लखनऊ: साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। साइबर ठगों ने इस बार उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड डीआईजी को अपना निशाना बनाया है। ठगों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए बेहद चालाकी से एक कहानी गढ़ी और अधिकारी से घरेलू सामान खरीदने के नाम पर एक लाख 75 हजार रुपये से अधिक की ठगी की। यह घटना न केवल साइबर अपराधों की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बड़े पदों पर रहे लोग भी इन ठगों के जाल में आसानी से फंस सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई 2025 को रिटायर्ड डीआईजी राकेश शुक्ला को सोशल पर रिटायर्ड आईएएस बलविंदर कुमार के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। अगले दिन मैसेज में कहा गया कि उनके एक मित्र, जो सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट हैं, घरेलू सामान सस्ते में बेच रहे हैं। इसके बाद वॉट्सऐप पर फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान की कुछ फोटो भेजी गईं। जिनकी कीमत 1.10 लाख रुपये बताई गई थी।
इस दौरान बातचीत और संदेश के माध्य से अवकाश प्राप्त पुलिस अधिकारी को विश्वास में लिया गया। फिर क्यूआर कोड भेजकर उनसे 1.75 लाख से दा की रकम वसूल लिए। 16 जुलाई को जब तय तारीख पर सामान नहीं पहुंचा और फोन करने पर ठगों का मोबाइल फोन बंद मिला। तब शुक्ला को खुद के ठगे जाने का पता चला। इसके बाद राकेश शुक्ला ने ऑनलाइन पोर्टल पर साइबर क्राइम सेल शिकायत दर्ज कराई।
साथ ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में भी प्राथमिककी दर्ज कराई। राकेश शुक्ला ने बताया कि उनके एक परिचित रिटायर्ड आएएएस अधिकारी बलविंदर कुमार के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। इसके बाद मैसेज आने शुरू हो गए। मैसेज पूरी तरह असली लग रहा था। इसी झांसे में आ गए थे।
नए-नए तरीके अपनाते हैं ठग
पुलिस का कहना है कि यह मामला उन नए तरीकों में से एक है जिसमें जालसाज वरिष्ठ नागरिकों और अधिकारियों को निशाना बनाकर उनके जानकारों के नाम का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे ठगी में कामयाब हो जाते हैं।



