World Mental Health Day : एक कदम मन की सेहत की ओर

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता और सहायता को बढ़ावा देता है। कार्यस्थल, आत्महत्या और बुजुर्गों की सेहत पर ध्यान देकर हम बेहतर समाज बना सकते हैं।

Share This Article:

नई दिल्ली: हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है, जिसका मकसद है लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़े भेदभाव को खत्म करना। आज विश्व में एक अरब से ज्यादा लोग मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। फिर भी, समाज में इसे लेकर गलत धारणाएं और शर्मिंदगी बनी हुई है, जो व्यक्तियों के जीवन को और कठिन बनाती है। मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य बीमारी की तरह स्वीकार करना और इस पर खुलकर बात करना समय की जरूरत है।

कार्यस्थल और मानसिक तनाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 60% लोग किसी न किसी काम में लगे हैं। कार्यस्थल का माहौल कर्मचारियों की मानसिक सेहत पर गहरा असर डालता है। लंबे समय तक काम का दबाव, उत्पीड़न या सहयोग की कमी तनाव और चिंता को बढ़ाती है। इससे न केवल कर्मचारी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मानसिक रोगों का खतरा भी बढ़ता है। नियोक्ताओं, सरकारों और विशेषज्ञों को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जो मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दे और तनाव को कम करे।

आत्महत्या: एक गंभीर खतरा

हर साल लाखों लोग आत्महत्या के कारण अपनी जिंदगी खो देते हैं। यह एक ऐसी त्रासदी है जो अकेलेपन, दर्द और निराशा से उपजती है। 2030 तक आत्महत्या की दर में 33% कमी का लक्ष्य था, लेकिन प्रगति धीमी है। इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम, संवेदनशीलता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश जरूरी है। समाज को चाहिए कि वह हर जरूरतमंद को सहारा दे।

बुजुर्गों की मानसिक सेहत

2030 तक हर छह में से एक व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक का होगा। उम्र बढ़ने के साथ अकेलापन, शारीरिक कमजोरी और कभी-कभी परिवार से उपेक्षा बुजुर्गों में मानसिक रोगों को बढ़ाती है। लगभग 14% बुजुर्ग मानसिक समस्याओं से जूझते हैं, जो उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। सामाजिक सहायता और सम्मानजनक माहौल उनकी सेहत के लिए जरूरी है।

आगे की राह

मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य बनाना होगा। कार्यस्थलों पर मानसिक सुरक्षा के नियम, बुजुर्गों के लिए सहायता केंद्र, और खुले संवाद की संस्कृति विकसित होनी चाहिए। सरकार और समाज को मिलकर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करना होगा। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। आइए, इस विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर संकल्प लें कि हम जागरूकता फैलाएंगे और जरूरतमंदों के लिए सहारा बनेंगे।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.