NIT राउरकेला: कोलन कैंसर की नई दवा का दावा

NIT राउरकेला के शोध में लंबी मिर्च (पिप्पली) से निकाला गया प्राकृतिक यौगिक ‘पाइपरलॉन्ग्यूमिन’ कोलन कैंसर की कोशिकाओं को चुन-चुनकर मारता पाया गया है, जबकि स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं। यह सस्ता और कम दुष्प्रभाव वाला इलाज जल्द ही मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।

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नई दिल्ली: अब तक आप लंबी मिर्च को सिर्फ खांसी-जुकाम या चटनी-अचार के लिए जानते थे, लेकिन ओडिशा के NIT राउरकेला के वैज्ञानिकों ने इसे कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) के इलाज में कारगर साबित कर दिखाया है। शोध में पाया गया कि लंबी मिर्च में मौजूद ‘पाइपरलॉन्ग्यूमिन’ नामक तत्व कैंसर कोशिकाओं को अंदर से खत्म कर देता है।

कोलन कैंसर क्यों है खतरनाक?

दुनिया में हर साल करीब 19 लाख लोग कोलन कैंसर की चपेट में आते हैं और 9 लाख से ज्यादा की मौत हो जाती है। भारत में भी यह कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। अभी इसका मुख्य इलाज कीमोथेरेपी है, जिसमें बाल झड़ना, उल्टी, कमजोरी और नसों का खराब होना जैसे भयानक साइड इफेक्ट होते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मरीजों का कैंसर कीमो दवाओं को भी जवाब देना बंद कर देता है।

लंबी मिर्च का जादू कैसे काम करता है?

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में कोलन कैंसर की कोशिकाओं पर पाइपरलॉन्ग्यूमिन डाला। नतीजा चौंकाने वाला था। नतीजे में पाया गया कि सिर्फ कैंसर कोशिकाएं मरीं, स्वस्थ कोशिकाएं पूरी तरह सुरक्षित रहीं। इस यौगिक ने कैंसर कोशिकाओं के अंदर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाया, जिसे वे सह नहीं सकीं और मर गईं। ऐसे में सामान्य कोशिकाएं इस तनाव को आसानी से झेल गईं। यानी यह दवा सिर्फ दुश्मन को निशाना बनाती है, अपने सैनिकों को नहीं मारती।

भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने किया कमाल

इस शोध का नेतृत्व एनआईटी राउरकेला के लाइफ साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर बिजेश कुमार बिस्वाल ने किया। उनके साथ राजीव कुमार साहू, स्तुति बिस्वाल, संबित कुमार पात्र और शिक्ष्या स्वरूपा पांडा ने दिन-रात मेहनत की। अमेरिका और बिहार की यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग दिया। शोध पत्र विश्व प्रसिद्ध जर्नल ‘बायो फेक्टर्स’ में छप चुका है।

मरीजों के लिए क्या है फायदा?

बहुत कम या न के बराबर साइड इफेक्ट।

लंबी मिर्च सस्ती और हर जगह उपलब्ध है, इसलिए दवा की कीमत भी कम रहेगी।

जिन मरीजों का कैंसर कीमो से नहीं मानता, उनके लिए भी नई उम्मीद।

आगे चलकर इसे कीमो दवाओं के साथ मिलाकर और बेहतर नतीजे लिये जा सकते हैं।

अब आगे क्या?

प्रो. बिस्वाल ने बताया कि अभी यह प्रयोगशाला और चूहों पर सफल रहा है। अब मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है। अगर सब ठीक रहा तो कुछ सालों में कोलन कैंसर का सस्ता और सुरक्षित भारतीय इलाज दुनिया के सामने होगा।m/

आप भी रखें ध्यान

कोलन कैंसर से बचने के लिए फाइबर युक्त खाना (सब्जी, फल, साबुत अनाज), कम तला-भुना, नियमित व्यायाम और 50 साल के बाद कोलोनोस्कोपी करवाना सबसे जरूरी है। लंबी मिर्च अब सिर्फ मसाला नहीं, उम्मीद की किरण बनने जा रही है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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