नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ते औद्योगिक विकास के दौर में रासायनिक आपात स्थितियां जन स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव ने नई दिल्ली के निर्माण भवन में रासायनिक आपात स्थितियों के जन स्वास्थ्य प्रबंधन पर तीन विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किए। यह पहल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ इंडिया) के सहयोग से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा विकसित की गई है।
मॉड्यूल का उद्देश्य
इन मॉड्यूल का लक्ष्य स्वास्थ्य पेशेवरों, आपातकालीन कर्मियों और नीति निर्माताओं को रासायनिक दुर्घटनाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है। ये मॉड्यूल राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों (आईएचआर 2005) के अनुरूप हैं।
तीन प्रमुख मॉड्यूल
मॉड्यूल 1: तैयारी, निगरानी और प्रतिक्रिया
यह मॉड्यूल रासायनिक आपात स्थितियों की रोकथाम, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए रणनीतियों पर केंद्रित है। यह स्वास्थ्य पेशेवरों को जोखिम मूल्यांकन और आपदा प्रबंधन की बुनियादी बातें सिखाता है।
मॉड्यूल 2: अस्पताल-पूर्व प्रबंधन
यह मॉड्यूल रासायनिक दुर्घटना के तुरंत बाद की प्रक्रियाओं, जैसे प्राथमिक उपचार और प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा, पर ध्यान देता है। यह आपातकालीन कर्मियों को तेजी से कार्य करने के लिए तैयार करता है।
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मॉड्यूल 3: चिकित्सा प्रबंधन
यह मॉड्यूल रासायनिक जोखिम से प्रभावित मरीजों के उपचार और देखभाल पर केंद्रित है। यह अस्पतालों में चिकित्सा प्रबंधन की तकनीकों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में कदम
इस शुभारंभ समारोह में स्वास्थ्य मंत्रालय, एनडीएमए, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, शैक्षणिक संस्थानों और डब्ल्यूएचओ इंडिया के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने आत्मनिर्भर और गतिशील भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता दोहराई। यह पहल रासायनिक आपात स्थितियों से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को बढ़ाने और जन स्वास्थ्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



