नइ दिल्ली: आजकल गुर्दों की सेहत एक ऐसी चुनौती बन गई है, जो चुपचाप लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। हाल के एक बड़े वैश्विक रिसर्च से पता चला है कि करीब 78 करोड़ वयस्क यानी हर सात में से एक क्रॉनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) से जूझ रहे हैं। 1990 में यह आंकड़ा महज 38 करोड़ था, लेकिन तीन दशक बाद यह दोगुना हो चुका है। अमेरिका के न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लैंगोन हेल्थ, ग्लासगो यूनिवर्सिटी और हेल्थ मेट्रिक्स इंस्टीट्यूट के सहयोग से किए गए इस अध्ययन ने चेतावनी दी है कि 2023 में ही किडनी की वजह से 15 लाख से ज्यादा मौतें हुईं, जो 1990 के मुकाबले 6 फीसदी ज्यादा हैं। अब यह बीमारी मौत के टॉप-10 कारणों में शुमार हो गई है, ठीक कैंसर या हार्ट अटैक जितनी गंभीर।
किडनी की बीमारी: समझें इसका मतलब और खतरे
सीकेडी गुर्दों की धीमी लेकिन लगातार कमजोरी है, जहां वे खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी को फिल्टर करने में नाकाम हो जाते हैं। शुरुआत में कोई खास निशान नहीं दिखता, लेकिन आगे चलकर थकान, पैरों-चेहरा सूजना, भूख कम लगना, पेशाब का रंग-गंध बदलना या सांस फूलना जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। अगर अनदेखा किया जाए, तो यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है, जिसके बाद डायलिसिस या ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता बचता है। इसके पीछे मुख्य वजहें हैं डायबिटीज (खून में चीनी का ज्यादा लेवल), हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा। ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं और अमीर-गरीब हर देश में तेजी से फैल रहे हैं। दिलचस्प बात, किडनी की खराबी सिर्फ गुर्दों को ही नहीं, बल्कि हार्ट अटैक का जोखिम भी 12% बढ़ा देती है। 2023 में यह जीवन की क्वालिटी बिगाड़ने वाले 12वें नंबर की समस्या बनी। खासकर गरीब इलाकों जैसे अफ्रीका, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका में जांच-इलाज की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं।
बचाव के उपाय: आज से ही अपनाएं ये आदतें
अच्छी खबर यह है कि किडनी की बीमारी को रोकना बिल्कुल संभव है, अगर हम स्मार्ट कदम उठाएं। यहां कुछ व्यावहारिक टिप्स हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट हो सकते हैं:
- डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को काबू में रखें: सबसे बड़ा बचाव यही है। अगर आपको डायबिटीज है, तो डॉक्टर की सलाह से दवाएं लें और ब्लड शुगर चेक करते रहें। हाई बीपी के लिए नमक कम खाएं (दिन में 5 ग्राम से ज्यादा न हो) और तनाव से दूर रहें। योग या मेडिटेशन इसमें मददगार साबित होते हैं।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें: मोटापा किडनी का दुश्मन है। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 18.5-24.9 के बीच रखने की कोशिश करें। इसके लिए कैलोरी काउंट करें। जंक फूड, सोडा और प्रोसेस्ड चीजें छोड़ें। हफ्ते में 150 मिनट वॉकिंग या लाइट एक्सरसाइज करें।
- संतुलित डाइट अपनाएं: किडनी को प्यार दें तो फल-सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन (जैसे दालें, मछली) ज्यादा लें। पोटैशियम-रिच फूड जैसे केला, संतरा सीमित रखें, खासकर अगर बीमारी के संकेत हों। रोज 2-3 लीटर पानी पिएं, लेकिन किडनी प्रॉब्लम होने पर डॉक्टर से पूछें।
- धूम्रपान और शराब से तौबा: सिगरेट किडनी की नसों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि ज्यादा अल्कोहल डिहाइड्रेशन का सबब बनता है। इन्हें छोड़ना ही सबसे बड़ा गिफ्ट है अपनी सेहत को।
- नियमित चेकअप करवाएं: साल में कम से कम एक बार यूरिन टेस्ट (प्रोटीन चेक के लिए) और ब्लड टेस्ट (क्रिएटिनिन लेवल) जरूर कराएं। खासकर 40 साल से ऊपर वालों, डायबिटीज या हाई बीपी वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य है। शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो दवाओं से ही कंट्रोल हो जाता है।
- हाल के वर्षों में नई दवाओं ने उम्मीद जगाई है, जो बीमारी की रफ्तार रोकती हैं और हार्ट प्रॉब्लम्स से भी बचाती हैं। लेकिन इनकी पहुंच अभी सीमित है।
आगे की राह: जागरूकता ही हथियार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में सीकेडी को अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी में जोड़ा है, ताकि 2030 तक गैर-संक्रामक बीमारियों से मौतें एक तिहाई कम हों। सरकारें, डॉक्टर और हम सबको मिलकर जागरूकता फैलानी होगी। स्कूलों-कॉलेजों में हेल्थ कैंप, सस्ते टेस्टिंग सेंटर्स और पॉलिसी चेंजेस से यह संकट टाला जा सकता है। याद रखें, किडनी की बीमारी ‘साइलेंट किलर’ है, लेकिन सतर्क रहें तो इसे हरा सकते हैं। आज से ही छोटे बदलाव शुरू करें, और अपनों को भी बताएं। सेहतमंद गुर्दे ही खुशहाल जिंदगी की कुंजी हैं।




