नई दिल्ली: आज के समय में हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि अब युवा और यहां तक कि छोटे बच्चों में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में राजस्थान में एक 9 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत ने सभी को चौंका दिया है। इसके अलावा देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आ चुकी हैं, जहां एक ही गांव के कई लोगों की मौत हार्ट अटैक से हो चुकी है।
आंकड़े क्या कहते हैं?
इंडियन हार्ट जर्नल 2024 की रिपोर्ट के अनुसार,भारत में हर पांच में से एक हार्ट अटैक का मामला 40 साल से कम उम्र के लोगों में आ रहा है। 2020 के मुकाबले 2024 में 30% अधिक युवा हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 28 लाख लोग हृदय संबंधी बीमारियों से मौत का शिकार हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या 25 से 45 आयु वर्ग के लोगों की है। बच्चों में भी हृदय रोगों का खतरा पिछले 5 सालों में 12% तक बढ़ा है।
हाल ही की कुछ घटनाएं
- कर्नाटक के हासन जिले में करीब एक महीने में 22 युवाओं की मौत हार्ट अटैक से हुई हैं
- राजस्थान में 9 साल की बच्ची की अचानक हार्ट अटैक से मौत।
- उत्तर प्रदेश के एक गांव में 10 दिनों के भीतर 6 लोगों की हार्ट अटैक से मौत।
- मुंबई में जिम करते हुए 23 साल का युवक हार्ट फेल होने से गिर पड़ा।
इसके पीछे की वजहें?
- खराब लाइफस्टाइल: आज के युवाओं में अनहेल्दी फूड, फास्ट फूड का सेवन और अनियमित दिनचर्या आम हो गई है।
- मानसिक तनाव: पढ़ाई, करियर और निजी जिंदगी का तनाव भी हार्ट प्रॉब्लम्स को बढ़ावा दे रहा है।
- कम होती फिजिकल एक्टिविटी: घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, और एक्सरसाइज ना करना हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचा रहा है।
- शराब और सिगरेट की लत: नशे की आदतें भी युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
- जेनेटिक फैक्टर: कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
डॉक्टर्स की सलाह
स्वस्थ दिल के लिए डॉक्टर नियमित एक्सरसाइज, संतुलित खानपान, समय पर हेल्थ चेकअप और स्ट्रेस मैनेजमेंट की सलाह दे रहे हैं। बच्चों के मामलों में पैरेंट्स को उनके खानपान और दिनचर्या का खास ध्यान रखने की जरूरत है। कहने का मतलब यह कि अगर समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो हार्ट अटैक का खतरा आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकता है। जरूरी है कि हम अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करें और दिल की सेहत को प्राथमिकता दें।



