नई दिल्ली: न्यूयॉर्क के एक मेडिकल सेंटर में 61 साल के व्यक्ति की मौत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मृतक बिना इजाजत एक एक्टिव एमआरआई रूम में दाखिल हुआ था। उसकी पत्नी वहां स्कैन करवाने गई थीं और उन्होंने स्कैन के बाद अपने पति को रूम में बुलाया था। जैसे ही वह अंदर पहुंचे, उनके गले में पड़ी करीब 9 किग्रा वजनी मेटल चेन मशीन की ओर तेजी से खिंच गई और वह जोर से मशीन की तरफ जा गिरे। इससे उनकी मौत हो गई।
एमआरआई मशीन कितनी खतरनाक है?
एमआरआई मशीनें शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाने के लिए बेहद शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल करती हैं। स्कैन से पहले मरीजों को खास निर्देश दिए जाते हैं कि वे सभी धातु की वस्तुएं, घड़ियां, गहने या धातु युक्त कपड़े हटाकर ही मशीन के करीब जाएं। लेकिन कई बार छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती हैं। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के मुताबिक, एमआरआई मशीनों में बना चुंबकीय क्षेत्र किसी भी आकार की धातु को अपनी ओर खींच सकता है। चाबियां, मोबाइल फोन से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक इसके असर में आ सकते हैं।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
यह पहला मामला नहीं है। 2001 में न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में 6 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। तब मशीन की चुंबकीय ताकत के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर हवा में उड़कर बच्चे के सिर से टकरा गया था, जिससे उसे गंभीर चोट लगी थी।
क्या है MRI और कैसे करता है काम?
एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग, एक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है जो मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स की मदद से शरीर के अंदर की साफ तस्वीरें बनाती है। यह एक्स-रे और सीटी स्कैन से अलग है। वह इसलिए कि इसमें रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता।
रेडियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, शरीर में मौजूद हाइड्रोजन एटम्स के स्पिन के जरिए एमआरआई मशीन इमेज तैयार करती है। शरीर का लगभग 70% हिस्सा पानी से बना है, इसलिए हाइड्रोजन स्पिन से शरीर के सॉफ्ट टिशू की समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक दिमाग, रीढ़ की हड्डी, घुटनों और शरीर के अन्य हिस्सों की जांच में इस्तेमाल होती है।
स्कैन से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
MRI स्कैन से पहले आमतौर पर मरीज सामान्य भोजन और दवा ले सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में स्कैन से पहले कुछ घंटों तक खाना न खाने की सलाह दी जाती है। अस्पताल पहुंचने पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री लेकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्कैन उसके लिए सुरक्षित है या नहीं।स्कैन के दौरान शरीर पर कोई मेटल न हो, इसके लिए मरीज को पहले ही चेतावनी दी जाती है। जिन वस्तुओं को हटाने की सलाह दी जाती है उनमें शामिल हैं:
- घड़ियां
- नेकलेस, झुमके
- बॉडी पियर्सिंग
- नकली दांत (अगर उनमें धातु है)
- सुनने की मशीन
- कुछ विग, जिनमें मेटल हो सकता है
एमआरआई मशीन कितनी ताकतवर होती है?
एमआरआई मशीनें 1 टेस्ला, 1.5 टेस्ला और 3 टेस्ला यूनिट की होती हैं। टेस्ला यूनिट मशीन की चुंबकीय ताकत को दर्शाती है। 3 टेस्ला मशीन में इतनी ताकत होती है कि वह लोहे की अलमारी तक को अपनी ओर खींच सकती है। मशीन जितनी ज्यादा टेस्ला क्षमता वाली होगी, उसका मैग्नेटिक फील्ड उतना ही मजबूत होगा।
क्या सोना और चांदी पहनकर स्कैन कराया जा सकता है?
रेडियोलॉजिस्ट के अनुसार, शुद्ध सोना या चांदी पहनकर स्कैन कराना नुकसानदेह नहीं होता, क्योंकि इनमें आयरन नहीं होता। हालांकि मिलावटी चांदी में लोहा मिलाने की आशंका रहती है, इसलिए उसे पहनने से मना किया जाता है।
कहने का मतलब यह कि MRI कराते समय सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। लापरवाही या जानकारी की कमी किसी की जान तक ले सकती है।



