नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी को हेल्थ हब के रूप में विकसित करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। इसका मकसद न केवल स्थानीय नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करना है, बल्कि इसे एक वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना भी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह बात रविवार को कैलाश कॉलोनी मेट्रो स्टेशन स्थित अत्याधुनिक एसएसबी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के उद्घाटन अवसर पर कहा।
दिल्ली स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी लाना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा उनकी उपेक्षा के कारण वर्षों से लचर पड़ी दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उनकी सरकार कटिबद्ध है और इसी दिशा में 24 निर्माणाधीन अस्पतालों के निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है। जल्द ही ये अस्पताल न सिर्फ दिल्ली की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे बल्कि राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर भी अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। यह अस्पताल न केवल दिल्ली वालों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि राजधानी को हेल्थ हब बनाने के संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसएसबी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़ रहा है, जिससे हर नागरिक को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
दिल्ली में प्रति 1000 लोगों पर 2 बेड भी उपलब्ध नहीं
मुख्यमंत्री ने दिल्ली की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल रही। आज भी दिल्ली में प्रति 1000 लोगों पर 2 बेड भी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ का न्यूनतम मानक 2 और विकसित देशों में यह संख्या 5 है। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि इस शर्मनाक स्थिति को बदलकर स्वास्थ्य ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाया जाए। हम नहीं चाहते कि किसी भी मरीज की मौत इलाज की कमी से हो। जहां बेहतरीन डॉक्टर, अत्याधुनिक तकनीक, किफायती इलाज और विश्वस्तरीय ट्रॉमा केयर की सुविधा हर नागरिक को मिले।
रक्त की एक बूंद से डीएनए जांच
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली को दुरुस्त करने की दिशा में दिल्ली सरकार नई तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों से अस्पतालों का आधुनिकीकरण कर रही है। हाल ही में सरकार ने अस्पतालों में ऐसे अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए हैं, जो रक्त की एक बूंद से डीएनए तक की जांच कर सकते हैं। इससे ब्लड डोनेशन की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान संभव होगी।



