नई दिल्ली: मातृ वन अरावली के 750 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह थीम आधारित शहरी वन होगा, जिससे प्रकृति प्रेरित हरित प्रयासों से पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना है। इसमें कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) भागीदारों, स्थानीय निवासी कल्याण संघों (आरडब्ल्यूए), गैर-सरकारी संगठनों, बहुराष्ट्रीय निगमों (एमएनसी), स्कूली बच्चों और सरकारी संगठनों के सहयोग से पौधे लगाए जाएंगे।
कार्बन उत्सर्जन सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती
मनोहर लाल ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन मानव जाति के लिए सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए कार्बन कैप्चर तकनीक का उपयोग करने के अलावा उन्होंने नागरिकों को वनों की कटाई रोकने और अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे वन मित्र बन सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किस प्रकार गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी कार्बन उत्सर्जन को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि देश के ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी पहले ही 50 प्रतिशत को पार कर चुकी है। इसके अलावा गुरुग्राम जैसे महानगरों को हरित भवन, वन्यजीव सफारी के माध्यम से पर्यावरण-पर्यटन, थीम-आधारित जैव विविधता पार्क आदि जैसी अग्रणी पहलों में दूसरों के लिए एक उदाहरण बनना चाहिए।
हृदय और फेफड़े का काम करेगा मातृ वन
भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि ‘मातृ वन‘ का हरित आवरण पूरे दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए हृदय और फेफड़े का काम करेगा। उन्होंने हरियाणा सरकार को इस वन भूमि को अरावली की स्थानीय वनस्पति प्रजातियों के वृक्षारोपण द्वारा ‘मातृ वन’ के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने मिशन लाइफ के विभिन्न घटकों भोजन बचाओ, पानी बचाओ, ऊर्जा बचाओ, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ई-कचरा प्रबंधन, एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध, स्वस्थ जीवन शैली अपनाओ का उल्लेख किया। यह एक ऐसा दृष्टिकोण जिसे प्रधानमंत्री ने विश्व के सामने प्रस्तुत किया है।

गुरुग्राम में ‘मातृ वन’ पहल
‘मातृ वन’ के मुख्य घटकों में गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड पर काबुली कीकर (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा) जैसी मौजूदा झाड़ियों को हटाना और ढाक/अमलताश के पेड़ लगाना शामिल होगा। इसके साथ ही अरावली में स्थानीय पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित करने के लिए थीम-आधारित वृक्षारोपण उपवनों का निर्माण भी शामिल होगा। इसमें बरगद, पीपल, गुल्लर, बेल पत्र, इमली, पिलखन, नीम, ढाक, सेमल, खिरनी, देसी कदम, अमलताश, बांस जैसे लंबे चक्र वाले पेड़, धौक, सालर, कुल्लू, खैरी जैसी अरावली प्रजातियां और गोया खैर, गंगेरन, मरोड़ फली जैसी झाड़ियां लगाई जाएंगी।
कौन-कौन से पौधे लेंगेगे
- बोधि वाटिका : बरगद, पीपाक, गुल्लर, पिलखन का उपवन
- बम्बूसेटम : बांस प्रजातियों का समूह
- अरावली प्रजाति अर्बोरेटम
- पुष्प वाटिका : फूलों वाले वृक्षों की प्रजातियों का समूह
- सुगंध वाटिका : सुगंधित वृक्षों की प्रजातियों का समूह
औषधीय पौधे वाटिका
- नक्षत्र वाटिका
- राशि वाटिका
- कैक्टस गार्डन
- तितली उद्यान
ये सुविधाएं भी होंगी
मातृ वन में प्रकृति पथ, साइकिल ट्रैक, योग स्थल, बैठने के स्थान/गजबोस, सार्वजनिक सुविधाएं, चारों कोनों पर पार्किंग, शोधित जल सिंचाई प्रणाली, धुंध व छिड़काव, जल संरक्षण के लिए चयनित स्थानों पर जलाशय और शहरी बाढ़ की रोकथाम शामिल होगी।



