नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा देश की पहली ऐसी विधानसभा बन गई है तो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगी। इससे हर महीने लगभग 15 लाख रुपये की बिजली बचत होगी और 10 फीसदी अतिरिक्त बिजली उत्पादन होगा, जिसे बेचकर दिल्ली सरकार अपना खजाना भी भर सकती है। यह पहल प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अनुरूप है और स्वच्छ, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी की बिजली मांग को सतत रूप से पूरा करने में मदद करेगी। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को 500 किलोवॉट की क्षमता वाले अत्याधुनिक रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र और नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन का लोकार्पण किया।
यह सौर ऊर्जा संयंत्र दिल्ली विधानसभा के संचालन को न केवल शत-प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित बनाता है, बल्कि लगभग 15 लाख रुपये प्रतिमाह की लागत बचत सुनिश्चित करता है और वार्षिक अनुमानित बचत 1.75 करोड़ रुपये तक हो सकती है। नेट मीटरिंग के माध्यम से अतिरिक्त विद्युत उत्पादन की भी आशा है।
ई-विधान प्रणाली
ई-विधान प्रणाली के तहत अब विधानसभा की समस्त कार्यवाही डिजिटल माध्यम से, पूर्णत: पेपरलेस रूप में संचालित होगी, जिससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव भी न्यूनतम होगा।
वन नेशन, वन एप्लीकेशन
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की यह पहल देशभर की विधायिकाओं व संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे डिजिटल एवं हरित परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि ‘वन नेशन, वन एप्लीकेशन’ की अवधारणा को साकार करती यह पहल केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संस्थागत मूल्यों में बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि संसदीय कार्य मंत्रालय दिल्ली विधानसभा को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा, ताकि यह संक्रमण सुचारू रूप से लागू हो और देशभर में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत हो।
विरासत को आधुनिकता से जोड़ा
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में हमारा एक समग्र प्रयास है। वर्ष 1912 में बने इस ऐतिहासिक भवन में देश की पहली संसद का संचालन हुआ था। आज हम उसी विरासत को आधुनिकता से जोड़ रहे हैं।
बचत को विकास कार्यों में लगाया जाएगा
गुप्ता ने यह भी बताया कि सौर ऊर्जा से होने वाली बचत को जनता के विकास कार्यों में लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त विधानसभा पुस्तकालय का डिजिटलीकरण तथा आईटी बुनियादी ढांचे का सशक्तीकरण भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की दिशा में एक मील का पत्थर बताया और कहा दिल्ली की विधानसभा को देश की राजधानी के अनुरूप ही अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, विशेषकर ऐसे समय में जब भारत 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर चुका है। यह पहल नवीनता, पारदर्शिता और संस्थागत उत्तरदायित्व के 21वीं सदी के शासन मॉडल को दर्शाती है।
इस प्रणाली में स्मार्ट डेलीगेट यूनिट्स, वोटिंग पैनल, RFID/NFC एक्सेस, बहुभाषी समर्थन, रियल टाइम दस्तावेज़ एक्सेस, HD कैमरों से सुसज्जित AV सिस्टम तथा सुरक्षित नेटवर्किंग की सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली विधानसभा की यह दोहरी पहल सौर ऊर्जा और डिजिटल विधायन की दिशा में न केवल भारत की नेट जीरो लक्ष्यो की पूर्ति मे योगदान है, बल्कि यह दर्शाती है कि सुशासन की असली शुरुआत लोकतांत्रिक संस्थाओ से ही होती है।



