पेड़ों का Universe: हर तने में बसती है जीवाणुओं की अनोखी दुनिया

अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि जीवित पेड़ों की लकड़ी के भीतर ये अनगिनत माइक्रोब्स छिपे रहते हैं, न सिर्फ छाल पर, बल्कि गहराई तक।

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नई दिल्ली: कल्पना कीजिए, जब आप किसी हरे-भरे पेड़ की छाया में सुकून महसूस कर रहे होते हैं, तो उसके मजबूत तने के अंदर एक पूरी की पूरी जीवंत दुनिया चल रही होती है। यह दुनिया (Universe) इतनी सूक्ष्म है कि आंखों से नजर नहीं आती, लेकिन इसमें करीब एक लाख करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म जीवाणु और बैक्टीरिया निवास करते हैं। अमेरिका की प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें पता चला कि जीवित पेड़ों  की लकड़ी के भीतर ये अनगिनत माइक्रोब्स छिपे रहते हैं, न सिर्फ छाल पर, बल्कि गहराई तक।

प्रकृति के चक्र को संभालने वाले अदृश्य योद्धा

ये छोटे-छोटे जीव भले ही अदृश्य हों, लेकिन वे धरती की हर बड़ी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। कार्बन के संतुलन से लेकर मौसम के बदलाव तक, इनकी भूमिका बेहद अहम है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के उत्तर-पूर्वी जंगलों से 16 अलग-अलग किस्मों के 150 पेड़ों के सैंपल इकट्ठा किए और उनका गहन विश्लेषण किया। ये नतीजे मशहूर वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में छपे हैं, जो बताते हैं कि पेड़ों का यह आंतरिक जीवन हमें पर्यावरण की गहराई समझने के लिए मजबूर करता है।

पेड़ के दिल और त्वचा में अलग-अलग निवासी

शोध से यह सामने आया कि पेड़ के दो मुख्य भागों – केंद्र (हार्टवुड) और बाहरी परत (सैपवुड) – में पूरी तरह अलग तरह के जीवाणु समुदाय पाए जाते हैं। केंद्र में ऐसे माइक्रोब्स रहते हैं जो बिना ऑक्सीजन के फलते-फूलते हैं, जबकि बाहरी हिस्से में ऑक्सीजन पर निर्भर जीव ज्यादा सक्रिय होते हैं। और तो और, ये समुदाय पेड़ की प्रजाति पर भी निर्भर करते हैं। उदाहरण के तौर पर, मेपल के पेड़ में पाए जाने वाले बैक्टीरिया पाइन की किस्म से बिलकुल भिन्न होते हैं। यह विविधता हर पेड़ में स्थिर दिखाई देती है, जो दर्शाता है कि पेड़ और उसके इन साथियों के बीच एक गहरा, पारस्परिक रिश्ता है।

पेड़ों के छिपे हुए साथी और उनका महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि इन जीवाणुओं को पेड़ का ‘सहजीवी साथी’ माना जाना चाहिए, क्योंकि वे मिलकर एक संपूर्ण इकाई बनाते हैं। कोई भी जीवित प्राणी अकेला नहीं जीता; वह अपने इन सूक्ष्म साथियों के साथ एक टीम की तरह काम करता है। ये माइक्रोब्स पोषण के चक्र, गैसों के निर्माण और अन्य रासायनिक क्रियाओं में योगदान देते हैं, जो पेड़ की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए जरूरी हैं।

कार्बन संग्रहण और जलवायु संरक्षण में बड़ा योगदान

जंगलों की यह आंतरिक गतिविधि इसलिए भी खास है क्योंकि पेड़ हर साल हवा से करोड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं। धरती पर पेड़-पौधे सबसे बड़े कार्बन स्टोर हैं, जिनमें 300 गीगाटन से ज्यादा कार्बन जमा होता है। अगर ये जीवाणु इस प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, तो जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में जंगलों की ताकत को नए तरीके से समझना होगा। इसके अलावा, ये माइक्रोब्स पेड़ों की बढ़ोतरी, बीमारियों से लड़ने की क्षमता, सड़ने से बचाव और मौसम की मार (जैसे बाढ़ या सूखा) झेलने में भी मदद कर सकते हैं। अगर हम जान लें कि कौन से जीवाणु पेड़ों को मजबूत बनाते हैं, तो जंगलों के संरक्षण और प्रबंधन में क्रांति आ सकती है।

दुनिया भर के पेड़ों में एक रहस्यमयी जैव विविधता छिपी

येल यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता जोनाथन गेविर्ट्जमैन ने एक बयान में कहा कि दुनिया भर के पेड़ों में एक रहस्यमयी जैव विविधता छिपी है, जिसमें असंख्य जीवाणु प्रजातियां अब तक अनदेखी रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन इनको बदलने से पहले, हमें इस सूक्ष्म दुनिया को समझना और संरक्षित करना चाहिए। इन छोटे जीवों में पेड़ों को तेजी से बढ़ाने, रोगों से बचाने या नए रसायनों का उत्पादन करने की अपार क्षमता हो सकती है, जो मानवता के लिए वरदान साबित हो सकती है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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