नई दिल्ली: भारत और चीन ने (India China Relations) लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को हल करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह समिति सीमा निर्धारण के लिए ठोस समाधान तलाशेगी। यह फैसला चीनी विदेश मंत्री वांग यी के हाल के भारत दौरे के दौरान लिया गया, जिसमें उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल से मुलाकात की। इसके साथ ही, चीन ने भारत की रेयर अर्थ सामग्री, उर्वरक (फर्टिलाइजर), और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का वादा किया है। गौरतलब है कि जुलाई 2025 में चीन ने इन सामग्रियों की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी। वांग यी 18 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर भारत आए थे, और सोमवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ गहन द्विपक्षीय वार्ता की थी।
वैश्विक बदलावों के बीच सहयोग पर जोर
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बातचीत में कहा कि वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। मुक्त व्यापार और वैश्विक व्यवस्था को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन, जो दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश हैं और जिनकी संयुक्त आबादी 2.8 अरब से अधिक है, को आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए। वांग यी ने भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ सामग्री, और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में सहायता का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर वांग यी से मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि पिछले साल रूस के कजान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए तियानजिन में होने वाली अगली मुलाकात का जिक्र करते हुए उत्साह जताया।
सीमा विवाद पर गहन चर्चा
वांग यी ने NSA अजित डोभाल के साथ सीमा विवाद पर विस्तृत बातचीत की। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच उत्पन्न तनाव दोनों के हित में नहीं थे। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने रिश्तों को नई दिशा देने और सीमा विवाद सुलझाने में महत्वपूर्ण बताया। डोभाल ने इस वार्ता को पहले की बैठकों की तरह सफल होने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में सीमा पर शांति और स्थिरता बनी है, और द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती आई है। डोभाल ने यह भी बताया कि पीएम मोदी जल्द ही SCO शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा करेंगे। भारत-चीन संबंधों में 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए तनाव के बाद तल्खी आई थी, लेकिन हालिया कूटनीतिक प्रयासों और समझौतों ने रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में प्रगति दिखाई है।
रेयर अर्थ सामग्री और मशीनों की आपूर्ति पर पाबंदी का प्रभाव
जुलाई 2025 में, चीन ने भारत को रेयर अर्थ सामग्री, महत्वपूर्ण मशीनों, और पुर्जों की आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। ये सामग्रियां इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, और अन्य प्रमुख उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा, फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों, जो भारत में iPhone का निर्माण करती हैं, ने अपने 300 से अधिक चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों को वापस बुलाने का फैसला किया था। माना जा रहा है कि यह कदम भारत के विनिर्माण क्षेत्र को प्रभावित करने के लिए उठाया गया था। अप्रैल 2025 में, चीन ने सात रेयर अर्थ सामग्रियों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिनके आयात के लिए विशेष लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया था। इस वजह से भारत को होने वाली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
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प्रतिबंधों के पीछे की वजह
चीन ने रेयर अर्थ सामग्रियों पर प्रतिबंध को राष्ट्रीय सुरक्षा और गैर-सैन्य उपयोग से जोड़ा था। अप्रैल 2025 में लागू नियमों के तहत, निर्यातकों को एक एंड-यूजर सर्टिफिकेट देना पड़ता है, जिसमें यह सुनिश्चित करना होता है कि इन सामग्रियों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों या अमेरिका को पुनर्निर्यात के लिए नहीं होगा। यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाला साबित हुआ, खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जो इन सामग्रियों पर काफी हद तक निर्भर हैं।



