ओजोन परत पर रिपोर्ट: अंटार्कटिक छिद्र में सकारात्मक बदलाव

रिपोर्ट से पता चलता है कि 2024 में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र पहले की तुलना में काफी छोटा रहा। यह खबर पर्यावरण प्रेमियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

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नई दिल्ली: पृथ्वी की रक्षा करने वाली ओजोन परत में लगातार सुधार हो रहा है, जो हानिकारक यूवी किरणों से हमें बचाती है। विश्व मौसम संगठन (WMO) की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2024 में अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र पहले की तुलना में काफी छोटा रहा। यह खबर पर्यावरण प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

ओजोन छिद्र में कमी का कारण

WMO के 2024 ओजोन बुलेटिन के अनुसार, पिछले साल ओजोन का क्षरण कम देखा गया। हालांकि, मौसमी बदलावों का इसमें कुछ योगदान रहा, लेकिन मुख्य वजह दशकों से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास हैं। यह रिपोर्ट विश्व ओजोन दिवस के मौके पर जारी की गई, जो वियना कन्वेंशन की 40वीं सालगिरह के साथ जुड़ी हुई है। वियना कन्वेंशन ने ओजोन समस्या को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी और देशों को एकजुट किया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे सराहा और कहा कि विज्ञान आधारित सहयोग से ही ऐसे चमत्कार संभव होते हैं। उन्होंने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को बहुपक्षीयता की मिसाल बताया, जिसने ओजोन परत को बचाने में अहम भूमिका निभाई।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की जीत

इस प्रोटोकॉल के जरिए ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों के उत्पादन और उपयोग में 99% से ज्यादा कटौती हुई है। ये रसायन पहले रेफ्रिजरेटर, एसी और यहां तक कि स्प्रे में इस्तेमाल होते थे। अब उम्मीद है कि ओजोन परत 1980 के स्तर पर इस सदी के बीच में पहुंच जाएगी। इससे त्वचा कैंसर, आंखों की बीमारियां और पर्यावरण को होने वाले नुकसान में कमी आएगी। WMO की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने जोर दिया कि इस साल का थीम ‘विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक’ है, जो संगठन के 75 सालों की यात्रा से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि ओजोन पर शोध सहयोग और डेटा शेयरिंग पर आधारित है, जो पर्यावरण संरक्षण के सबसे सफल समझौते की बुनियाद है।

सतत विकास में योगदान

ओजोन की सुरक्षा ने UN के कई सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत किया है, जैसे स्वास्थ्य सुधार (SDG 3), जलवायु कार्रवाई (SDG 13), भुखमरी खत्म करना (SDG 2) और भूमि जीवन की रक्षा (SDG 15)। यह दिखाता है कि पर्यावरणीय कदम कितने व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

2024 में अंटार्कटिक ओजोन छिद्र

रिपोर्ट से पता चलता है कि इस साल ओजोन परत ज्यादातर जगहों पर मजबूत रही। अंटार्कटिका में वसंत ऋतु में बनने वाला छिद्र छोटा था, जिसमें अधिकतम ओजोन की कमी 4.61 करोड़ टन दर्ज हुई। यह 2020-2023 के बड़े छिद्रों से कम है। छिद्र देर से शुरू हुआ और जल्दी ठीक हो गया, जो रिकवरी की शुरुआत का संकेत है।

किगाली संशोधन का महत्व

रिपोर्ट में 2016 के किगाली संशोधन पर भी चर्चा है, जिसके तहत HFC गैसों को कम करने का लक्ष्य है। ये गैसें ग्रीनहाउस प्रभाव वाली हैं और ओजोन रसायनों का विकल्प बनीं। 164 देशों ने इसे अपनाया है, जिससे सदी के अंत तक तापमान बढ़ोतरी को 0.5 डिग्री तक रोका जा सकता है। यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि सामूहिक प्रयास से पर्यावरणीय चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है। ओजोन परत की रिकवरी जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में प्रेरणा देती है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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