GST दरों में सुधार से दौड़ेगी अर्थव्यवस्था

अर्थशास्त्री रमेश सिंह का कहना है “जीएसटी सुधार एक सामान्य प्रक्रिया हैं किन्तु इन सुधारों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरे मुद्दे को..

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GST COUNCIL की 56वीं बैठक में भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में एतिहासिक बदलाव किए गए। सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म करते हुए चार स्लैब आधारित जीएसटी व्यवस्था को दो-स्लैब व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया। ये नवीनतम सुधार 22 सितम्बर से सम्पूर्ण देश में लागू हो जायेंगे। सरकार के अनुसार ये सुधार जीएसटी संरचना को एक सरल रूप देंगे। पहले की चार स्लैब आधारित व्यवस्था को हटाकर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्लैब आधारित प्रणाली से कराधान अधिक पारदर्शी और सुगम हो जायेंगा। वहीं डिमेरिट गुड्स और लक्जरी उत्‍पादों पर 40 प्रतिशत की दर राजस्व संतुलन सुनिश्चित करेगी।

किस पर कितना टैक्स

इस नई प्रणाली में घरेलू आवश्यक वस्तुएं जैसे साबुन, टूथपेस्ट, औषधि, कृषि मशीनरी, खाद्य पदार्थ जैसे पैकबंद नमकीन, भुजिया, सॉस, पास्ता, चॉकलेट, कॉफी आदि को 12 प्रतिशत के स्लैब से हटा कर 5 प्रतिशत के स्लैब में रखा गया है। वही उपभोक्ता वस्तुएँ जैसे छोटी कार, टीवी, एयर कंडीशनर, सीमेंट और ऑटो पार्ट्स पर GST 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर पूर्ण GST छूट तथा शिक्षा का सामान और खाद्य पदार्थ जैसे कि अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध, पनीर और भारतीय ब्रेड जैसी आवश्यक वस्तुओं को शून्य GST में शामिल किया गया है।

अर्थशास्त्री रमेश सिंह के अनुसार जीएसटी सुधार हैं सामान्य प्रक्रिया का अंग

रमेश सिंह कहते हैं “आर्थिक सुधार प्रक्रिया के अंतर्गत सरकार का उद्देश्य न सिर्फ केंद्र और राज्यों के अप्रत्यक्ष करों को समाहित करके “एक राष्ट्रीय कर” (जीएसटी) में परिवर्तित करने का रहा है बल्कि इन करों की दर “एक” हो पर भी बल रहा है। राजा चेलइया समिति 1991 और केलकर समिति 2002 की सिफारिशों के अनुसार जीएसटी को सरल बनाया गया है। अब जीएसटी में मूलतः दो दरें रह जाएंगी- 5% और 18% (अन्य 0 प्रतिशत और 40 प्रतिशत)

रमेश सिंह मानते हैं कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत अभी केंद्र और राज्यों के अन्य अप्रत्यक्ष करों को समाहित किया जाना है। जैसे- पेट्रोलियम उत्पाद, एल्कोहल, भूमि एवं भवन पंजीकरण इत्यादि अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।

जीएसटी सुधारों के पीछे कई हैं जिम्मेवार कारण

अर्थशास्त्री रमेश सिंह नई जीएसटी दरों के लिए कई कारणों को जिम्मेवार मानते हैं। उनके अनुसार पहला कारण मांग से संबंधित है। महामारी के बाद से ही उद्योग एवं व्यवसाय जगत की मांग रही है कि आम आदमी को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जाए ताकि देश स्तर पर मांग बढ़ें। इस तरह मध्यम वर्ग के असंतोष को कम करना भी सरकार का उद्देश्य है। दूसरा कारण टेरिफ़ संबंधी है, अमेरिका के 50 प्रतिशत के टेरिफ़ के कारण जो आयात घटा है, उसकी भरपाई करना। तीसरा कारण है देश में निम्न निजी क्षेत्रीय निवेश को बढ़ावा देना। निजी निवेश पिछले कई वर्षों से निम्न बना हुआ है। वहीं चौथा कारण लोगों की खानपान की आदत को सुधारने से जुड़ा है; फूड डिलीवरी एप्स पर 18 प्रतिशत की जीएसटी दर दूसरी ओर होटल डिलीवरी सर्विस और राशन पर 5 प्रतिशत की जीएसटी दर खानपान की प्रवत्ति में सुधार कर सकती है।

वर्तमान चुनौतियाँ

रमेश सिंह के अनुसार, जीएसटी दरों को अचानक कम करने से व्यापारियों को वर्तमान में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जैसे कई कच्चे माल जिन पर 18 या 12 प्रतिशत की जीएसटी दर थी, अब 5 प्रतिशत कर देने से, इनपुट क्रेडिट लेने में समस्याएं आ सकती हैं।    

पुरानी प्रणाली में अन्य समस्याएं

ऐसा पाया गया है पुरानी व्यवस्था में जीएसटी के चार स्लैब व्यापारी और उपभोक्ता दोनों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करते थे। उदाहरण के लिए रोटी और पराठे का अंतर, पनीर और चीज के बीच अस्पष्ट वर्गीकरण, मानव के द्वारा निर्मित फाइबर पर 18 प्रतिशत जीएसटी वही यार्न पर 12 प्रतिशत जबकि तैयार कपड़े पर 5 प्रतिशत जीएसटी इस तरह की विसंगतिया कोर्ट-कचहरी के विवादों को भी निमंत्रण देती थी, जिस कारण न्यायपालिका पर भी बोझ बदता था, किन्तु नई जीएसटी व्यवस्था में संस्थागत सुधारों के तौर पर जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के प्रावधान से निश्चित ही विवादों का समाधान आसानी से निकलेगा।

क्या है वस्तु एवं सेवा कर (GST)

101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2017 द्वारा प्रस्तुत यह भारत में वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई पर लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है। जिसने केंद्र और राज्यों द्वारा 17 अलग-अलग करों और 13 उपकरों का स्थान ले लिया है। जीएसटी का विचार पहली बार 2000 में प्रस्तावित किया गया था, जिसमें बिक्री कर सुधारों का अध्ययन करने के लिए राज्य वित्त मंत्रियों की एक समिति गठित की गई थी। इस विचार को आगे बढ़ाते हुए और राज्यों के बीच व्यापक सहमति के साथ, 101 वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया और 2016 में इसकी पुष्टि की गई, जिससे जीएसटी का मार्ग प्रशस्त हुआ। जीएसटी को औपचारिक रूप से 1 जुलाई 2017 की आधी रात को लागू किया गया था। 

GST की विशेषताएँ

संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित GST परिषद, केंद्र और राज्यों का एक संयुक्त मंच है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, इसमें राजस्व/वित्त राज्य मंत्री सदस्य होते हैं तथा प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामित वित्त, कराधान या अन्य संबंधित मंत्री सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।

दोहरी GST संरचना: इसमें केंद्रीय GST (CGST) और राज्य GST (SGST) शामिल हैं। एकीकृत GST (IGST) अंतर्राज्यीय लेनदेन के लिये लागू की जाती है।

GST परिषद: यह GST नीतियों और कर दरों के फैसले करने वाला निकाय है।

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN): भारत में करदाताओं को रिटर्न तैयार करने, दाखिल करने, अप्रत्यक्ष कर देनदारियों का भुगतान करने और अन्य अनुपालनों को पूरा करने में सहायता करता है।

जीएसटी एक बड़ी उपलब्धि क्यों है?

करदाता में बढ़ोत्तरी: जीएसटी आने से 2017 में 66.5 लाख से बढ़कर वर्ष 2025 में 1.51 करोड़ करदाता हो गए, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

राजस्व में वृद्धि: वित्त वर्ष 2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपए का ग्रॉस जीएसटी इकठ्ठा किया गया, जो 18 प्रतिशत की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ केवल चार वर्षों में दोगुना हो गया।

जीएसटी दरो में बदलाव लंबे समय से अपेक्षित रहे हैं, अनुमान है कि इन नए सुधारों से न सिर्फ अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी होगी; बल्कि लोगों का जीवन स्तर भी बदलेगा।

विशेष आभार – रमेश सिंह (अर्थशास्त्री)

Kuldeep Dwivedi

kuldeepd999@gmail.com

NewG India का अनुभवी चेहरा, 2017 में RGPV से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। सिविल सर्विसेज कोच और लेखक के तौर पर शिक्षाकुल, एग्जामपुर, कॉसमॉस पब्लिकेशन जैसे अनेक संस्थानों में काम करने का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में NewG India में एंकर एवं रिसर्च स्कॉलर के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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