तालाबों पर कब्जे को लेकर NGT सख्त

 वर्ष 2021 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गाजियाबाद में तालाबों से अतिक्रमण को हटाने को लेकर आदेश दिया था। चार साल बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। इस पर एनजीटी ने प्रदेश के मुख्य सचिव और गाजियाबाद के डीएम से शपथपत्र के साथ पूरी रिपोर्ट तलब की है।

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नोएडा: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गाजियाबाद में तालाबों के अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपना लिया है। दर असल 4 साल पहले एनजीटी ने ये अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। मामले में अब सरकारी सुस्ती की जानकारी होने के बाद एनजीटी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और गाजियाबाद के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे जिले में तालाबों पर हुए अतिक्रमण को लेकर 2021 के आदेश के अनुपालन में उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से देने को कहा है। 30 अगस्त को चार साल से लंबित आदेशों के अनुपालन को लेकर दाखिल की गई एक्सीक्यूशन एप्लीकेशन की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने राज्य में खासतौर पर गाजियाबाद में जलाशयों के संरक्षण के प्रतिबद्धता की कमी पर आश्चर्य जताया है।

सुनवाई 7 अक्टूबर को

मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।इएनजीटी ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह प्रतिवादियों को नोटिस भेजे और इस मामले को एक अन्य समान प्रकरण (OA 958/2024) के साथ जोड़ दिया। दरअसल यह एक्सीक्यूशन एप्लीकेशन सुशील राघव द्वारा दायर की गई, जो उनकी पूर्व याचिका OA 65/2020 से जुड़ी है। इस याचिका का निपटारा 17 मार्च, 2021 को एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव और गाजियाबाद डीएम को विशेष निर्देशों के साथ किया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता श्रीपर्णा दासगुप्ता ने दावा किया कि संबंधित अधिकारियों ने अब तक अधिकरण के किसी भी निर्देश का पालन नहीं किया है। उन्होंने इस साल 28 अप्रैल को OA 958/2024 (हिमांशु त्यागी बनाम राज्य सरकार) में गाजियाबाद डीएम द्वारा दायर एफिडेविट का हवाला देते हुए कहा कि अतिक्रमण अब भी मौजूद हैं।

231 तालाब अब भी अतिक्रमित की चपेट में

इस साल अप्रैल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से दाखिल ताजा शपथपत्र में खुलासा हुआ कि 1,075 तालाबों में से 231 अब भी अतिक्रमित हैं। दासगुप्ता ने कहा कि कुल 1,075 तालाबों का क्षेत्रफल 525.19 हेक्टेयर है, जिसमें से लगभग 10% यानी 57.04 हेक्टेयर (231 तालाबों का क्षेत्र) अब भी अतिक्रमण में है। उन्होंने कहा, “हालांकि डीएम का कहना है कि संबंधित तहसीलदारों को निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि अधिकरण ने 2021 में ही अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।

28 अक्टूबर 2020 को अधिकरण में दाखिल अपने एफिडेविट में जिलाधिकारी ने स्वीकार किया था कि जिले के बड़े पैमाने पर जलाशय अतिक्रमण की जद में हैं। उन्होंने बतया था कि करीब 72.90% (183 जलाशय) अतिक्रमित हैं। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। जिले में कुल 261 जलाशयों में से केवल 49 ही अतिक्रमणमुक्त हैं। 17 मार्च 2021 को एनजीटी ने आदेश दिया था कि मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें और समय-समय पर जिलाधिकारी के साथ बैठक कर अतिक्रमण हटाने और जलाशयों की बहाली के लिए निगरानी करें। इस प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी भी उचित तरीके से सुनिश्चित की जाए। उठाए गए कदमों का डाटा संबंधित वेबसाइटों पर जागरूकता के लिए डाला जाए।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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