कमी से आत्मनिर्भरता तक: कैसे बदल रहा है हमारा भारत?

यह विश्लेषण 4 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए भाषण पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि कैसे पिछले 12 वर्षों में भारत कमियों (Shortages) के पुराने दौर से निकलकर हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बना है। रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड ₹1.78 lakh crore का उत्पादन और ₹38,000 crore का निर्यात, स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण, 22.35 billion का मासिक UPI लेनदेन, और 2 lakh से ज्यादा स्टार्टअप्स के साथ भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और साल 2047 तक एक पूरी तरह से 'विकसित भारत' का रूप लेने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

Share This Article:

नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि एक देश केवल एक दशक में अपनी पूरी पहचान और काम करने के तरीके को कैसे बदल सकता है? आज से 12-15 साल पहले का भारत और आज का यानी साल 2026 का भारत—दोनों में एक जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देता है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भारत की इसी ऐतिहासिक यात्रा का पूरा लेखा-जोखा देश के सामने रखा है। उन्होंने बहुत ही सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाया कि कैसे हमारा देश “कमियों और अड़चनों (Shortages)” के पुराने दौर को पीछे छोड़कर “आत्मनिर्भरता” और “आत्मविश्वास” के नए युग में प्रवेश कर चुका है। अब भारत का केवल एक ही संकल्प है—साल 2047 तक एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र यानी ‘विकसित भारत’ का निर्माण करना।

रक्षा मंत्री ने सरकार के तीन कार्यकालों (Terms) को एक बेहद खूबसूरत क्रम में समझाया:

  • पहला कार्यकाल (First Term): देश में बुनियादी चीजों की कमियों को दूर किया गया, नए अवसरों का विस्तार किया गया और देश की कार्य-संस्कृति (Work Culture) को पूरी तरह बदला गया।
  • दूसरा कार्यकाल (Second Term): लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को हकीकत (Achievements) में बदला गया और देश को आत्मनिर्भरता की पटरी पर मजबूती से दौड़ाया गया।
  • तीसरा कार्यकाल (Third Term): वर्तमान में सरकार “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” (सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन) की नीति के साथ विकसित भारत की एक मजबूत और कभी न हिलने वाली नींव रख रही है।
  • चौथा कार्यकाल (Fourth Term): रक्षा मंत्री ने पूरा भरोसा जताया है कि आने वाले चौथे कार्यकाल में पूरी दुनिया एक विकसित भारत के उदय की साक्षी बनेगी।

आइए इस पूरी विकास यात्रा को इतिहास के झरोखे, वर्तमान के आंकड़ों और भविष्य की संभावनाओं के साथ बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।

‘मेक इन इंडिया’ की सफलता और सेमीकंडक्टर क्रांति

ऐतिहासिक संदर्भ और तुलनात्मक विश्लेषण

जब साल 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) अभियान की शुरुआत की गई थी, तब देश-विदेश के कई आलोचकों और जानकारों ने इसे एक “विफल योजना” (Failure) करार दिया था। लोगों का मानना था कि भारत जैसे देश में जहां सुई से लेकर बड़े जहाजों तक के कल-पुर्जे बाहर से आते हैं, वहां भारी स्तर पर विनिर्माण (Manufacturing) संभव नहीं है।

लेकिन आज के वर्तमान ट्रेंड्स बताते हैं कि ‘मेक इन इंडिया’ ने न केवल सफलता के नए झंडे गाड़े हैं, बल्कि यह आज भी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission) जिसकी शुरुआत 2021 में हुई थी। शुरुआत में इसे लेकर भी लोगों के मन में भारी संदेह था। लेकिन सरकार ने ‘प्लग-एंड-प्ले‘ (Plug-and-Play) इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल (जहां कंपनियों को बिजली, पानी और जमीन जैसी तमाम सुविधाएं तैयार मिलती हैं और उन्हें सिर्फ अपनी मशीनें लगाकर काम शुरू करना होता है) के आधार पर बड़े-बड़े सेमीकंडक्टर पार्क स्थापित किए।

बड़ी उपलब्धि: इसी दूरदर्शी नीति का नतीजा है कि पिछले साल भारत ने सफलतापूर्वक अपने खुद के स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन शुरू कर दिया है। जो देश कल तक इन चिप्स के लिए ताइवान और चीन जैसे देशों पर निर्भर था, वह आज खुद इनका निर्माता बन रहा है।

रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग: उत्पादन और निर्यात के नए रिकॉर्ड

भारत का रक्षा क्षेत्र कभी अपनी जरूरत की 70% से अधिक चीजें विदेशों से आयात करने के लिए जाना जाता था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व बदलावों के आंकड़े साझा किए, जो वाकई चौंकाने वाले हैं:

रक्षा उत्पादन और निर्यात की तुलना (FY 2014-15 बनाम वर्तमान)

पैमाना (Parameter)वित्तीय वर्ष (FY) 2014-15 / 2013-14वर्तमान स्थिति (FY 2025-26)विकास की रफ़्तार / बदलाव
वार्षिक रक्षा उत्पादन (Annual Defence Production)लगभग ₹59,000 करोड़₹1.78 लाख करोड़ (सर्वकालिक उच्च स्तर)पहले के मुकाबले 3 गुना अधिक
रक्षा निर्यात (Defence Exports)मात्र ₹686 करोड़ (FY 2013-14)₹38,000 करोड़ से अधिकपहले के मुकाबले लगभग 57 गुना की भारी बढ़ोतरी

यह आंकड़ा सिर्फ कागजी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि आज दुनिया के तमाम देश ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बने हथियारों, मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस) और रक्षा प्रणालियों पर कितना भरोसा कर रहे हैं। रक्षा के क्षेत्र में आयात करने वाला देश अब एक बड़ा निर्यातक बन चुका है।

डिजिटल क्रांति, 5G और टेक मैन्युफैक्चरिंग

आज भारत का आम नागरिक भी इस बात को महसूस करता है कि सब्जी की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक पैसे का लेन-देन कितना आसान हो गया है। रक्षा मंत्री ने भारत की इस डिजिटल और मैन्युफैक्चरिंग क्रांति के कुछ बेहद ठोस उदाहरण दिए:

  • UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का दबदबा: केवल अप्रैल के महीने में ही देश में 22.35 बिलियन (2,235 करोड़) यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत 29 लाख करोड़ रुपये थी। आज भारत का यह यूपीआई सिस्टम केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से विस्तार हो रहा है।
  • मोबाइल और ऑटोमोबाइल विनिर्माण: भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है। इसके साथ ही गाड़ियों (Automobile) के निर्यात और देश में ही बनने वाले रेलवे इंजनों (Indigenous Locomotives) के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है।
  • 5G से 6G का सफर: देश में पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित ‘Make-in-India 5G’ नेटवर्क को रिकॉर्ड समय में पूरे देश में फैलाया गया है। इतना ही नहीं, भारतीय वैज्ञानिक और कंपनियां अब 6G तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम कर रही हैं।

भ्रष्टाचार पर लगाम और ‘JAM ट्रिनिटी’ का जादू

पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था का विश्लेषण

साल 2014 से पहले देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं के पैसों की “लीकेज” (घोटाले और बिचौलियों द्वारा पैसे खा जाना) थी। एक पूर्व प्रधानमंत्री ने तो यहां तक कहा था कि ‘केंद्र से 1 रुपया चलता है, तो गरीब तक सिर्फ 15 पैसे पहुंचते हैं।’ भ्रष्टाचार को लोगों ने एक तरह से देश की नियति मान लिया था।

इस लाइलाज बीमारी का इलाज सरकार ने ‘JAM ट्रिनिटी’ (Jan Dhan, Aadhaar & Mobile) के जरिए किया।

  • जनधन (Jan Dhan): हर गरीब का बैंक खाता खोला गया।
  • आधार (Aadhaar): हर नागरिक को एक डिजिटल पहचान दी गई ताकि फर्जी लाभार्थियों को हटाया जा सके।
  • मोबाइल (Mobile): सीधे फोन पर सूचना और बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई गईं।

Direct Benefit Transfer (DBT) का असर: इस पारदर्शी सिस्टम की वजह से सरकार अब तक ₹51 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर चुकी है। सबसे खास बात यह है कि इस तकनीक के कारण बीच के बिचौलियों का खात्मा हुआ और सरकार के ₹4.3 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने या लीक होने से बच गए।

इसी तरह टैक्स व्यवस्था में किए गए GST (वस्तु एवं सेवा कर) के ऐतिहासिक सुधार ने शुरुआत की चिंताओं को दूर करते हुए केंद्र और राज्यों के बीच “सहकारी संघवाद” (Cooperative Federalism) का एक बेहतरीन मॉडल पेश किया है, जिससे देश का राजस्व लगातार बढ़ रहा है।

कड़े फैसले, स्टार्टअप इकोसिस्टम और आर्थिक मजबूती

रक्षा मंत्री ने उन मुद्दों का भी जिक्र किया जिन्हें कभी “सुलझाना असंभव” माना जाता था:

  1. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 का खात्मा: इसके बाद वहां विकास और शांति का एक नया दौर शुरू हुआ है।
  2. नक्सलवाद पर नकेल: देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करते हुए नक्सलवाद को खत्म करने के ठोस प्रयास किए गए हैं।

व्यापार और अर्थव्यवस्था में सुधार

सरकार ने देश के उद्यमियों (Entrepreneurs) को केवल बिजनेसमैन नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले और देश की संपत्ति बनाने वाले (Wealth Creators) के रूप में सम्मान दिया है। ‘जन विश्वास’ जैसे कानूनों के जरिए व्यापार करने की बाधाओं को दूर किया गया (Ease of Doing Business)।

  • स्टार्टअप की बाढ़: पिछले 12 वर्षों में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो चुकी है।
  • यूनिकॉर्न (Unicorns) का उदय: ऐसी स्टार्टअप कंपनियां जिनका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर से अधिक है, उनकी संख्या 4 से बढ़कर 125 हो चुकी है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है और इसी ताकत के बल पर हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हैं।

विकास भी, विरासत भी: सांस्कृतिक पुनरुत्थान

भारत की प्रगति केवल फैक्ट्रियों, सड़कों और डिजिटल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि भारत की संस्कृति ही इसकी पहचान, एकता और राष्ट्रीय चेतना की सबसे बड़ी नींव है। इसलिए देश के भौतिक विकास के साथ-साथ हमारी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को भी संजोया जा रहा है।

इसके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • सांस्कृतिक गलियारों का निर्माण: काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, उज्जैन का महाकाल लोक और असम में मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना के जरिए हमारे पवित्र स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है।
  • ऐतिहासिक प्रतीकों का सम्मान: लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी संसद भवन में न्याय और संप्रभुता के प्रतीक ‘सेंगोल’ (Sengol) की स्थापना की गई है।
  • धरोहरों की वापसी और डिजिटलीकरण: विदेशों में स्मगलिंग करके ले जाई गई देश की प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों को वापस भारत लाया जा रहा है। साथ ही हमारे प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों (Manuscripts) को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकें।

तकनीक के युग में पत्रकारिता और मानवीय मूल्य

भाषण के अंतिम हिस्से में रक्षा मंत्री ने आज के ‘कम्युनिकेटिव अबंडेंस’ (सूचनाओं की भरमार) के दौर में मीडिया की भूमिका पर बहुत ही गहरी और व्यावहारिक बात कही।

आज के समय में चुनौती जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि जानकारी की सटीकता और विश्वसनीयता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीक ने आज पत्रकारिता के तौर-तरीकों को बदल दिया है। लेकिन राजनाथ सिंह का मानना है कि तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, वह इंसानी रचनात्मकता, संवेदना और बुद्धि को कभी पीछे नहीं छोड़ सकती।

रक्षा मंत्री का संदेश: “पत्रकारिता की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह AI की रफ्तार और इंसान की सहानुभूति (Human Empathy) के बीच कैसा संतुलन बनाती है। AI खबरों को तेज और सटीक बना सकता है, लेकिन हमारी भावनाएं ही इसे विश्वसनीय और मानवीय बनाए रखेंगी।”

उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि गलत खबरें (Misinformation / Fake News) समाज और हमारी सेनाओं के मनोबल पर बहुत बुरा असर डालती हैं। पत्रकारिता में ‘सबसे पहले खबर देने’ की होड़ से कहीं ज्यादा जरूरी है ‘सही और सटीक खबर देना’। खासकर जब बात देश की सुरक्षा, सेना और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के सम्मान की हो, तो मीडिया के हर एक शब्द में राष्ट्रीय जिम्मेदारी झलकनी चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह संबोधन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत अब एक ‘याचक’ या मजबूर देश नहीं रहा। आज का भारत अपनी नीतियां खुद तय करता है, अपनी जरूरत के साजो-सामान खुद बनाता है और वैश्विक मंचों पर जब बोलता है, तो पूरी दुनिया उसकी बात को ध्यान से सुनती है। पिछले 12 साल कमियों को अवसरों में बदलने की कहानी रहे हैं, और आने वाले साल भारत को एक समृद्ध, सशक्त और ‘विकसित भारत’ के रूप में स्थापित करने के साक्षी होंगे।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.